अब घर बैठकर मिनटों में ऑनलाइन बनाए अपना वोटर आईडी, जानें पूरी प्रोसेस

अगर आप नया वोटर आईडी कार्ड बनवाना चाहते हैं या वोटर कार्ड में कुछ बदलाव करवाना चाहते हैं, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके लिए अब आपको चुनाव कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। आप यह काम अब घर बैठकर मिनटों में कर सकेंगे। इसके लिए आपको इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट www.nvsp.in पर लॉग ऑन कर इसके लिए आवेदन करना होगा।

हर चुनाव के बाद वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। मगर, इस बार आगामी लोकसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को ऑनलाइन अपडेशन की सुविधा दी गई है। इसके अलावा इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने वेब आधारित एप्लिकेशन की पहल शुरू की है। इसके जरिए ऑफिसर्स को एसएमएस अलर्ट के माध्यम से नई रजिस्ट्रेशन के बारे में पता चल जाता है।

पहले, इलेक्शन ऑफिस को घर घर जाकर सर्वे करना पड़ता था, जिसमें बूथ के अधिकारी घरों में जाते थे और वोटर लिस्ट से नाम और पते चेक करते थे। बताते चलें कि देशभर से करीब 7500 इलेक्टोरल ऑफिसर्स को इस नए प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इससे उन्हें एसएमएस अलर्ट के जरिए रजिस्ट्रेशन या बदलाव के बारे में सूचना मिलेगी।

यह करना होगा

सबसे पहले www,nvsp.in वेबसाइट पर जाएं और संबंधित दस्तावेज अपलोड कर दें।

बता दें कि अपडेशन के लिए एक पासपोर्ट साइज फोटो, पहचान पत्र जैसे बर्थ सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, डाइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड या हाई स्कूल मार्कशीट हो सकती है।

पते के प्रमाण के लिए आपका राशन कार्ड, पासपोर्ट, डाइविंग लाइसेंस या बिजली, पानी व टेलिफोन बिल हो सकता है।

इसके बाद अपनी एप्लीकेशन को सबमिट कर दें। इसके बाद आपके पास एक ई-मेल आएगा, जिसमें अपडेशन और एप्लिकेशन आईडी होगी।

एप्लिकेशन आईडी के जरिए आप अपनी रिक्वेस्ट ट्रैक कर सकते हैं। इसके एक महीने के अंदर आपको वोटर कार्ड जारी कर दिया जाएगा।

नया वोटर आईडी के लिए ऐसा होगा रजिस्ट्रेशन, वोटर आई में सुधार कराने के लिए

कमाल की है यह दूध दुहने वाली मशीन, एक मिंट में निकलती है 2 लीटर दूध

देश के तमाम ग्रामीण इलाकों में गाय या भैंस का दुध दुहने में हाथों का इस्तेमाल किया जाता है और सदियों से यही पारंपरिक तरीका अपनाया जा रहा है। लेकिन जब से डेयरी फार्मिंग की नई-नई तकनीकें सामने आई हैं पारंपरिक तरीके पीछे छूटते जा रहे हैं। मिल्किंग मशीन यानी दूध दुहने की मशीन ने डेयरी फार्मिंग और पशुपालन की दुनिया में क्रांति ला दी है।

मशीन से दुध निकालना काफी सरल है और इससे दूध का उत्पादन भी 15 फीसदी तक बढ़ जाता है। मशीन से दूध निकालने की शुरुआत डेनमार्क और नीदरलैंड से हुई और आज यह तकनीक दुनिया भर में इस्तेमाल की जा रही है। आजकल डेरी उद्योग से जुड़े अनेक लोग पशुओं से दूध निकालने के लिए मशीन का सहारा ले रहे हैं।

पशुओं का दूध दुहने वाली मशीन को मिल्किंग मशीन के नाम से जानते हैं। इस मशीन से दुधारू पशुओं का दूध बड़ी ही आसानी से निकाला जा सकता है। इससे पशुओं के थनों को कोई नुकसान नहीं होता है। इससे दूध की गुणवत्ता बनी रहती है और उस के उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। यह मशीन थनों की मालिश भी करती और दूध निकालती है।

इस मशीन से गाय को वैसा ही महसूस होता है, जैसे वह अपने बच्चे को दूध पिला रही हो। शुरुआत में गाय मशीन को लेकर दिक्कत कर सकती है लेकिन धीरे-धीरे इसे आदत हो जाती है और फिर मशीन से दूध दुहने में कोई दिक्कत नहीं होती।

मशीन से मिलता है स्वच्छ दूध

मिल्किंग मशीन से दूध निकालने से लागत के साथ-साथ समय की भी बचत होती है और दूध में किसी प्रकार की गंदगी नहीं आती। इस से तिनके, बाल, गोबर और पेशाब के छींटों से बचाव होता है। पशुपालक के दूध निकालते समय उन के खांसने व छींकने से भी दूध का बचाव होता है। दूध मशीन के जरीए दूध सीधा थनों से बंद डब्बों में ही इकट्ठा होता है.

मिल्किंग मशीन के बारे में जानकारी

मिल्किंग मशीन कई तरह की होती है। जो डेयरी किसान अपनी डेयरी में पांच लेकर पचास गाय या भैंस पालते हैं उनके लिए ट्रॉली बकेट मिल्किंग मशीन पर्यापप्त है। ये मशीन दो तरह की होती सिंगल बकेट और डबल बकेट। सिंगल बकेट मिल्किंग मशीन से 10 से 15 पशुओं का दूध आसानी से दुहा जा सकता है वहीं डबल बकेट मिल्किंग मशीन से 15 से चालीस पशुओं के लिए पर्याप्त है।

ट्रॉली लगी होने के कारण इस मशीन को फार्म में एक जगह से दूसरी जगह ले जाना सुविधाजनक होता है। दिल्ली-एनसीआर में डेयरी फार्म के उपकरण बनाने वाली कंपनी के सेल्स हेड और आधुनिक डेयरी फार्मिंग के जानकार रोविन कुमार ने बताया कि मशीन से दूध दुहने से पशु और पशुपालक दोनों को ही आराम होता है।

उन्होंने बताया कि मशीन के अंदर लगे सेंसर गाय के थनों में कोई दिक्कत नहीं होने देते और निर्वाध रूप से दूध निकलने देते हैं। उन्होंने बताया कि मशीन से दूध दुहने में 4 से 5 मिनट का वक्त लगता है, जिसमें कुल दूध का साठ फीसदी दूध शुरुआत के दो मिनट में निकल आता है और बाकी का बाद में।

आपको बता मिल्किंग मशीन  की कीमत 26000 रुपए  है । दिल्ली-एनसीआर में इन मशीनों को बनाने वाली कई कंपनियां हैं और पशुपालकों को ये मशीन आसानी से उपलब्ध है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं बगैर ट्राली के भी ये मशीने उपलब्ध हैं और रेट भी काफी कम हैं।

फिक्स टाइप मिल्किंग मशीन

फिक्स टाइप मिल्किंग मशीन को फार्म के एक हिस्से में स्थापित किया जाता है। इसमें जरूरत के हिसाब से एक से लेकर तीन बकेट तक बढ़ाया जा सकता है। इस मशीन के रखरखाव में खर्चा कम आता है और एक-एक कर पशुओं को मशीन के पास दुहने के लिये लाया जाता है। ये मशीन 15 से 40 पशुओँ वाले डेयरी फार्म के लिए पर्याप्त है।

मशीन से भैंस का दूध दुहना भी आसान

रोविन कुमार ने बताया की गाय और भैंस दोनों के थनों में थोड़ा अंतर होता है, मशीन में थोड़ा सा बदलाव कर इससे भैंस का दूध भी आसानी से दुहा जा सकता है। भैंस का दूध निकालने के लिए मशीन के क्लस्टर बदलने होते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, बिहार में मिल्किंग मशीन का प्रचल तेजी से बढ़ता जा रहा है। और लोग पारंकपरिक तरीके के बजाए मशीन के जरिए दूध दुहने को तवज्जो दे रहे हैं।

उत्पादन ज्यादा और लागत कम

एक और अहम बात है मशीन द्वारा दूध दुहने से दूध की मात्रा में 10 से 15 फीसदी बढ़ोतरी हो जाती है। मशीन मिल्किंग द्वारा दूध की उत्पादन लागत में काफी कमी तो आती ही है, साथ-साथ समय की भी बचत होती है। यानी परेशानी भी कम और दूध भी ज्यादा। इसकी सहायता से पूर्ण दुग्ध-दोहन संभव है जबकि परम्परागत दोहन पद्धति में दूध की कुछ मात्रा अधिशेष रह जाती है।

मशीन द्वारा लगभग 1.5 से 2.0 लीटर तक दूध प्रति मिनट दुहा जा सकता है. इसमें न केवल ऊर्जा की बचत होती है बल्कि स्वच्छ दुग्ध दोहन द्वारा उच्च गुणवत्ता का दूध मिलता है। इन मशीनों का रखरखाव भी बेहद सरल है, सालभर के मेंटिनेंस का खर्चा मात्र 300 रुपये आता है।

मिल्किंग मशीनों पर मिलती है सब्सिडी

कई राज्य सरकार मिल्किंग मशीनों की खरीद पर सब्सिडी भी दे रही है और बैंकों से इन्हें खरीदने के लिए लोन भी मिल रहा है। पशुपालकों को इसके लिए अपने जिले के पशुपालन अधिकारी और बैंकों के कृषि और पशुपालन विभाग के अफसरों से संपर्क करना चाहिए।

मशीन से दूध दुहने के दौरान बरतें सावधानी

अगर पशु के पहले ब्यांत से ही मशीन से दूध निकालेंगे तो पशु को मशीन से दूध निकलवाने की आदत हो जाएगी। शुरुआत में मशीन द्वारा दूध दुहते समय पशु को पुचकारते हुए उस के शरीर पर हाथ घुमाते रहना चाहिए, ताकि वह अपनापन महसूस करे। दूध दुहने वाली मशीन को पशुओं के आसपास ही रखना चाहिए ताकि वे उसे देख कर उस के आदी हो जाएं, वरना वे अचानक मशीन देख कर घबरा सकते हैं या उसकी आवाज से बिदक सकते हैं।

वीडिओ देखे

ಹಾಲು ಕರೆಯುವ ಯಂತ್ರ ಗಳು ದೊರೆಯುತ್ತವೆMilking machine Bangalore: 9481865059,9060018006

Posted by Milking Machines on Thursday, April 26, 2018

ज्यादा जानकारी के लिए आप निचे दिए पते पर संपर्क करें

Address: No.57, 3rd A Cross,
1st Main, Havanoor Extension,
Nagasandra Post, Hesaraghatta Main Road,
Bengaluru, Karnataka 560073

Phone: 094818 65059

ये है पेडल से चलने वाला पंप एक घंटे में निकलता है 5000 लीटर पानी

खेती के लिए जो सबसे ज्यादा जरूरी चीज है वो है पानी ।पानी के बिना खेती की कल्पना करना भी मुश्किल है । लेकिन सिंचाई के लिए जरूरी ईंधन और बिजली हर किसान नहीं खरीद सकता । ऐसे किसानो के लिए बिना खर्चा किये अब आ गया है पेडल पंप जा ट्रेडल पंप (treadle pump)। इस पंप की खसयत यह है के पानी निकलने के लिए आपको बस खड़े होकर पेडल दबाने होते है । जिस से पानी अपने आप निकलना शुरू हो जाता है ।

इस पंप को एक जगह से दूसरी जगह लेकर जाना बहुत आसान है क्योंकि इसका वजन सिर्फ 12 किल्लो है ।एक आदमी जिसका वजन 60 किल्लो है वो इस पंप से 15 फ़ीट गहरे पानी को उठा कर 45 फ़ीट तक सिंचाई कर सकता है । यह मशीन एक घंटे में 2000- 5000 लीटर पानी निकल सकती है ।

सिर्फ खेत में ही नहीं इसे आप अपने घर की छत पर पानी वाली टंकी में पानी पहुंचने के लिए भी इसका इस्तमाल कर सकते है । इसके इलावा आप इसके इस्तमाल से बगीची को भी पानी दे सकते है । इसके साथ हम फवारा सिंचाई भी कर सकते है । इसकी कीमत भी सिर्फ 4050 रुपये से शुरू हो जाती है ।

कहाँ से खरीदें यह ट्रेडल पंप (treadle pump)

यह ट्रेडल पंप (treadle pump) कई कम्पनियों द्वारा त्यार किया जाता है । आप इस लिंक https://dir.indiamart.com/impcat/treadle-pump.html के ऊपर क्लिक करके सभी कम्पनियों के नाम जान सकते है और किसी भी कंपनी से इसे खरीद सकते है । इसके इलावा हम आपको एक कंपनी का नाम और एड्रेस बताएँगे जिस से आप इस मशीन को खरीद सकते है उस कंपनी का नाम है “एकफ्लो ट्रेडले पंप (Ecoflo Treadle Pump)” यह नासिक महाराष्ट्र की कंपनी है । इसको खरीदने के लिए आप इस नंबर 08048402340 पर संपर्क कर सकते है ।

यह पंप कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

बहुत ही कमल का है ये आधुनिक थ्रेशर,वीडियो देखें

फसलों की गहाई में मशीन (थ्रेशर) का बड़ा योगदान है। गहाई मशीनों के उपयोग से समय पर गहाई पूरी करके पैदावार की क्षति को जहां काफी हद तक कम किया जा सका है वहीं गहाई का कार्य जो पारम्परिक तरीके से बहुत श्रमसाध्य हुआ करता था, अब बहुत आसान हो गया है।

महीनों तक चलने वाला गहाई का कार्य अब कुछ दिनों में ही सम्पन्न हो जाता है। देश में गहाई मशीनों की संख्या लगभग 25 लाख से ज्यादा है।

यह थ्रेशर कैसे काम करता है उसके लये वीडियो देखें

यह थ्रेशर बहुत ही आधुनिक है और बड़ी ही सफाई से काम करता है ।यह थ्रेशर GS AUTO FEED MULTI CROP THRESHER ,नंदयाल,आंध्रा प्रदेश द्वारा त्यार किया गया है ।

इस थ्रेशर की सहयता से विभिन्न फसलों जैसे सोयाबीन, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि तथा तिलही व दलहनी फसलों जैसे अलसी, सरसों, मूंग, चना, उड़द आदि की गहाई की जाती है।

अगर आप इस मशीन की कीमत और दूसरी जानकारी चाहिए तो निचे दिए हुए नंबर पर संपर्क करें 9010889900 ,9010801581 ,9849751998

जंगली बीजों की खेती कर लाखों कमाएं, मोदी सरकार तैयार कर रही 10,000 करोड़ का बाजार

जंगली बीज (सीड) की खेती कर लाखों रुपए कमा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार आपको यह मौका देने जा रही है। सरकार इन बीजों से बायो-फ्यूल तैयार करेगी, जिससे हवाई जहाज उड़ेंगे।

अभी हवाई जहाज उड़ाने के लिए भारत सालाना लगभग 30,000 करोड़ रुपए के फ्यूल का आयात करता है। सरकार आने वाले चार-पांच साल में इस आयात की राशि को लगभग 10,000 करोड़ रुपए कम करना चाहती है। इसकी भरपाई के लिए देश में बायो जेट फ्यूल बनाए जाएंगे।

कैसे होगी जंगली बीज से लाखों की कमाई

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि गैर खाद्य तेल वाले जंगली बीज से आसानी से बायो जेट फ्यूल का उत्पादन किया जा सकता है। देश के वैज्ञानिकों ने इसे तकनीकी रूप से साबित भी कर दिया है।

इन बीजों में मुख्य रूप से रतनजोत, मोह, साह, टोली नामक जंगली बीज है जो उड़ीसा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र व झारखंड जैसे इलाकों में भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि जट्रोफा का उत्पादन देश में कम है, इसलिए फिलहाल उससे इस्तेमाल के लायक बायो जेट फ्यूल बनाना मुमकिन नहीं है।

क्या होगी कीमत

गडकरी ने बताया कि इन जंगली बीज को 10-12 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से सरकार खरीदेगी। 3 किलोग्राम से एक लीटर फ्यूल का उत्पादन किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि अभी एयरलाइंस लगभग 70 रुपए प्रति लीटर की दर से फ्यूल की खरीददारी करती है। अगर हम इन कंपनियों को 52 रुपए प्रति लीटर देंगे तो कंपनियों को भी फायदा होगा और किसानों को भी।

गडकरी ने बताया कि सरकार आने वाले वर्षों में अपने आयात बिल को कम करना चाहती है। इसलिए सरकार चाहती है कि हवाई जहाज के फ्यूल के आयात बिल में 10,000 करोड़ तक कमी लाए जाए।

हवाई यात्रा भी हो जाएगी सस्ती

जंगली बीज से बायो जेट फ्यूल बनाने से हवाई यात्रा की लागत में 20 फीसदी से अधिक की गिरावट आ जाएगी। उन्होंने बताया सरकार जल्द ही इस प्रकार की नीति तैयार करने जा रही है, जिसे कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।

अब ड्रोन से होगी खेती, दसवीं पास भी बन सकता है ड्रोन पायलट इस तरह करें अप्लाई

एक दिसंबर, 2018 से ड्रोन का कमर्शियल इस्तेमाल शुरू हो जाएगा। सरकार ने सोमवार को ड्रोन नीति जारी कर दी। अब ड्रोन के जरिए बड़े शहरों की ऊंची बिल्डिंग में होने वाली समस्याओं का समाधान आसान हो जाएगा।

काफी बड़े इलाके में होने वाली खेती को भी इससे मदद मिलेगी। ड्रोन की मदद से फसल में लगने वाले कीड़े का आसानी से पता लगाया जा सकेगा। लेकिन ड्रोन का पायलट बनने के लिए 18 साल का होना जरूरी है। पायलट कम से कम 10वीं पास हो और उसे अंग्रेजी का भी ज्ञान हो। तभी उसे ड्रोन चलाने का लाइसेंस जारी किया जाएगा।

कैसे मिलेगा ड्रोन चलाने की इजाजत

इसके लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ऐप लाने जा रहा है। इस ऐप के जरिए अप्लाई करना होगा। ऐप से ही पता चल जाएगा कि इजाजत मिली है या नहीं। अगर इजाजत नहीं मिली है तो आप ड्रोन नहीं चला सकेंगे।

अधिकतम 400 फीट तक उड़ा सकेंगे ड्रोन

सरकार के नियम के मुताबिक ड्रोन को अधिकतम 400 फीट तक उड़ाया जा सकेगा। लेकिन ड्रोन आपको दिखते रहना चाहिए। मतलब ड्रोन को ऐसी जगह पर फिलहाल भेजने की इजाजत नहीं होगी जो पायलट की आंखों के रेंज से बाहर हो।

250 ग्राम से कम भार वाले ड्रोन को नैनो ड्रोन की श्रेणी में रखा गया है। इस ड्रोन को उड़ाने के लिए सरकार की इजाजत की जरूरत नहीं होगी। लेकिन स्मॉल, मीडियम एवं लार्ज ड्रोन के पायलट को सरकारी ऐप पर अपना पंजीयन कराना होगा। 250 ग्राम से अधिक भार वाले सभी ड्रोन को पंजीयन कराना होगा और उड़ाने के लिए लाइसेंस लेना होगा।

फिलहाल ई-कॉमर्स कंपनियां सामान पहुंचाने के लिए नहीं कर पाएंगी ड्रोन का इस्तेमाल

कई ई-कामर्स कंपनियां ड्रोन से सामान की डिलिवरी का प्लान बना रही है। लेकिन फिलहाल वे ऐसा नहीं कर पाएंगी। क्योंकि ड्रोन को पायलट की आंखों से ओझल होने की इजाजत नहीं दी गई है।

यह किसान एक साल में दो बार उगाता है गोभी, कमाता है 10 लाख रुपए

गेहूं और मेंथा की खेती छोड़कर एक किसान गोभी की खेती कर रहा है। यह किसान 51 बीघे में गोभी की खेती कर रहा है और हर साल करीब 10 लाख रुपए की कमाई करता है। इसके साथ ही वह अपने गाँव के अन्य किसानों को भी गोभी की खेती के लिए जागरूक कर रहा है।

विकास खंड आलमपुर जाफराबाद के गाँव विछुरैया निवासी किसान राजेश सिंह (45 वर्ष) पत्ता गोभी की खेती करते हैं। राजेश ने बताया, ” पहले मैं गेहूं और मेंथा की खेती करता था, लेकिन मुझे ज्यादा मुनाफा नहीं होता था। पड़ोस के गाँव में एक किसान सब्जी की खेती करता था। उसे देखकर मैंने भी सब्जी की खेती के बारे में सोचा।

काफी सोच विचार के बाद मैं बंद गोभी की खेती करने लगा हूं। मैं चार साल से गोभी की खेती करता हूं। पिछले साल मैंने 51 बीघे में गोभी की खेती की थी, जिससे मुझे करीब 10 लाख रुपए का फायादा हुआ था। ” राजेश ने गाँव के कुछ अन्य किसानों के खेत भी बटाई पर ले रखे हैं।

राजेश ने आगे बताया, ” मैं साल में दो बार गोभी उगाता हूं। एक बार पौधे लागने के कुछ दिनों बाद फिर से नर्सरी कर देता हूं। एक तरफ अगैती फसल कट जाती है तो पहले से तैयार पौधे लगा देता हूं। दूसरी फसल में फूल ज्यादा महंगे नहीं बिकते, लेकिन पैदावार अच्छी होने से आदमनी अच्छी हो जाती है।”

एक साल में दो बार उगाते हैं गोभी

राजेश ने बताया, ” जुलाई माह के पहले सप्ताह में मैं नर्सरी डाल देता हूं। इस दौरान काफी ध्यान देना होता है। 22 से 25 दिन में गोभी की नर्सरी तैयार हो जाती है । गोभी की खेती के लिए रेतीली दोमट मिटटी सबसे अच्छी होती है।

बंद गोभी की फसल को उगाने से पहले खेत को मिटटी पलटने वाले हल से या ट्रेक्टर से अच्छी तरह से पलट लेता हूं। इसके बाद लगभग 3 या 4 बार गहरी जुताई करके खेत में पाटा लगाकर भूमि को समतल बना लेता हूं।

इसके बाद इसमें पौध लगाता हूं। पौध डालने से पहले 5 किलो ग्राम गोबर की खाद प्रति क्यारी मिला देनी चाहिए और 10 ग्राम म्यूरेट ऑफ़ पोटाश व 5 किलो यूरिया प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से क्यारियों में मिला देना चाहिए।

पौध 2.5 से 5 सेन्टीमीटर दूरी की कतारों में डालना चाहिए। क्यारियों में बीज बुवाई के बाद सड़ी गोबर की खाद से बीज को ढक देना चाहिए। इसके 1 से 2 दिन बाद नालियों में पानी लगा देना चाहिए या हजारे से क्यारियों को पानी देना चाहिए।

एक बीघे में तीन से चार हज़ार पौधे लगते हैं। खेती में आने वाली कुल लागत के बारे में उन्होंने बताया, ” निराई, दवाई पौध, सिंचाई और अन्य खर्चे मिलाकर एक बीघे में करीब पांच हजार रुपए की लागत आती है। ” नवंबर माह में फसल तैयार हो जाती है। इसके बाद दिसंबर में फिर दूसरे सीजन के लिए नर्सरी डाल दी जाती है। इसके बाद दिसंबर में पौधे लगा दिए जाते हैं, जो फरवरी में तैयार हो जाते हैं। इस मौसम में गोभी का अच्छा दाम मिलता है। ”

जैविक खाद का करते हैं प्रयोग

गोभी के अच्छे उत्पादन के लिए राजेश जैविक खाद का प्रयोग करते हैं। राजेश घर पर भी जैविक खाद बनाते हैं, जिससे फसल में लागत कम आती है। राजेश ने बताया, ” जैविक खाद की प्रयोग से उत्पादन काफी अच्छा होता है।

इसके साथ साथ गोभी का रंग भी बहुत शानदार निकलकर आता है जो देखने में बहुत अच्छा लगता है। पौध भी अच्छी होती है। जैविक खाद की वजह से पौधे की जड़ का विकास अच्छे तरीके से होता है। जैविक होने के कारण दाम भी अच्छा मिल जाता है।

” राजेश ने आगे बताया, ” मैं गोभी को बेचने हल्द्वानी की मंडी ले जाता हूं, जहां अच्छा दाम मिल जाता है। एक बीघे में करीब 50000 हजार रुपए की गोभी बिक जाती है। एक बीघे में करीब 1200 कटटा गोभी निकलती है। एक कटटे में 22 बंद गोभी होती है।”

इस राज्य सरकार ने बनाया नया क़ानून, MSP से कम कीमत पर पैदावार खरीदने वाले व्यापारियों को होगी एक साल की जेल

सरकार ने फसलों की खरीद के मामले में काफी सख्ती बरतते हुए यह नियम बना दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर अगर कोई व्यापारी खरीद करते पकड़ा जाएगा तो उसे एक साल की जेल की सजा होगी.

गौरतलब है कि खरीफ सीजन की फसल आने में बस एक महीना ही बचा है. इसलिए महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति पैदावार तय एमएसपी से कम पर नहीं खरीदेगा, चाहे वह व्यापारी ही क्यों न हो. अगर कोई ऐसा करता पकड़ा गया तो उसे एक साल की जेल की सजा हो सकती है और 50,000 रुपये जुर्माना भी देना पड़ सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, बुधवार को एक कैबिनेट मीटिंग के बाद राज्य सरकार ने महाराष्ट्र एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग एक्ट में संशोधन को मंजूरी दे दी है. इससे होगा यह कि अब ऐसे किसी ‘बाजार क्षेत्र’ का अलग से कोई निर्धारण नहीं होगा जहां जिंसों की खरीद-बिक्री की जाती हो.

इसकी जगह अब पूरे राज्य को ही एक बाजार माना जाएगा और व्यापारियों को किसी एपीएमसी बाजार में कारोबार के लिए अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी. यानी इससे व्यापारियों के लिए भी एक तरह की सहूलियत है. वे महाराष्ट्र की किसी भी मंडी से खरीद कर सकेंगे.

इससे किसानों को भी बेहतर कीमत मिल सकेगी. अभी तक बाजार में मंदी या अन्य कारणों का हवाला देकर अक्सर व्यापारी एमएसपी से भी कम कीमत पर किसानों की फसल खरीद लेते थे.

सरकार की नई एमएसपी नीति को लागू करने की जिम्मेदारी अब सिर्फ सरकारी खरीद एजेंसियों की ही नहीं, बल्कि निजी व्यापारियों की भी होगी. इसका किसानों को काफी फायदा मिल सकता है.

उदाहरण के लिए फिलहाल महाराष्ट्र के अकोला, लातूर और अमरावती जैसे बाजारों में तूर दाल 3,600 से 3,700 रुपये प्रति क्व‍िंटल बिक रही है. यह केंद्र सरकार द्वारा तय एमएसपी 5,675 रुपये से काफी कम है. पिछले साल पीक सीजन के दौरान तिलहन 2,600 से 2,700 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था, जबकि उसके लिए एमएसपी 3,050 रुपये तय किया गया था.

अनमैरिड कपल भी होटल में बुक कर सकते हैं 1 रूम, ऐसे में पुलिस करे कार्रवाई तो ये है आपका अधिकार

अनमैरिड कपल को कई अधिकार मिल हुए हैं लेकिन कुछ लोग इन अधिकारों के बारे में जानते नहीं। जैसे-होटल में किसी अनमैरिड कपल का एक रूम में रुकना गुनाह नहीं है। ऐसे में यदि पुलिस आप से पूछताछ करे तो आपको डरने की जरूरत नहीं है। आप खुद को मिले अधिकारों के तहत पुलिस से बात कर सकते हैं।

होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, ऐसा कोई भी लॉ नहीं है जो बालिग युवक-युवती को किसी होटल में एक कमरे में ठहरने से रोके। दोनों के पास आईडी कार्ड होना जरूरी है। कोई शंका होने पर पुलिस पूछताछ कर सकती है लेकिन ऐसे में गिरफ्तार करने का अधिकार पुलिस को नहीं है।

सार्वजनिक जगहों पर अश्लील हरकत करना जरूर गैरकानूनी है। पब्लिक प्लेस पर ऐसा करते पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। भारतीय कानून के मुताबिक कोई भी बालिग अपनी मर्जी से होटल में ठहर सकता है।

हाईकोर्ट एडवोकेट ने बताया ऐसे में पुलिस कार्रवाई करे तो क्या करें….

  • हाईकोर्ट एडवोकेट संजय मेहरा ने बताया कि, भारतीय वयस्कता अधिनियम के मुताबिक 18 साल की लड़की और 21 साल के लड़के को अपनी मर्जी से संबंध बनाने और शादी करने का अधिकार है।
  • बालिग युवक-युवती किसी भी होटल में रूम भी बुक कर सकते हैं। उन्हें अपना आईडी प्रूफ जमा करना होगा। आईडी प्रूफ देने के बाद कोई होटल संचालक रूम बुक करने से मना नहीं कर सकता।
  • ऐसे में यदि पुलिस छापा मारती है तो पुलिस को युवक-युवती अपने रिश्ते के बारे में बता सकते हैं। आईडेंटिटी प्रूफ दिखा सकते हैं और परिजनों से बात करवा सकते हैं।

  • ऐसे मामलों में पुलिस इम्मोरल ट्रैफिक एक्ट के तहत कार्रवाई करती है। अनैतिक गतिविधियों को रोकने के लिए इस एक्ट का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन यदि किसी युवक-युवती का आपस में संबंध है और इसकी जानकारी उनके घर में भी है तो पुलिस उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकती।
  • कई होटलों में रूम इसलिए नहीं दिए जाते क्योंकि उन्हें पुलिस एक्शन का डर होता है। स्थानीय प्रशासन भी अनैतिक गतिविधियों को रोकने के लिए ऐसे दिशा-निर्देश समय-समय पर देते रहता है लेकिन जिन युवक-युवतियों के संबंध सही हैं और उनकी जानकारी परिजनों को भी है तो वह परिजनों से पुलिस की बात करवा सकते हैं।

मौसम का सबसे ताजा अपडेट, दिल्ली-UP समेत 16 राज्यों में तेज बारिश की चेतावनी

दिल्‍ली-एनसीआर में बृहस्पतिवार सुबह जोरदार बारिश हुई। इससे जहां ओर एक उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली वहीं, बारिश की वजह से सड़कों पर पानी भर गया और नोएडा से दिल्‍ली जाने वाले रास्‍ते पर लंबा जाम लग गया। जाम के चलते लोग दोपहर तक परेशान रहे।

वहीं, मौसम विमाग ने आग दो-तीन दिन बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित 16 राज्यों के कुछ इलाकों में शुक्रवार को भी तेज बारिश की चेतावनी जारी की है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कुछ इलाकों में शुक्रवार तेज बारिश हो सकती है।

दिल्ली-NCR में मूसलाधार बारिश, सड़कों पर पानी भरने से कई जगह ट्रैफिक जाम

दिल्ली में एक बार फिर से मौसम के तेवर बदले हुए नजर आए। बृहस्पतिवार सुबह दिल्ली के साथ नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद के इलाकों में हुई झमाझम बारिश के चलते तमाम इलाकों में जाम लग गया।

यहां पर लगा है जाम

  • एनएच-9
  • आनंद विहार
  • आश्रम
  • धौला कुंआ
  • मूलचंद
  • नोएडा सेक्टर-121

नोएडा का हाल रहा बेहाल

  • सुबह हुई बारिश के बाद जाम से शहरवासी जूझते रहे
  • शहर के दर्जन भर मार्गाें पर भीषण जाम लगा, लोग घंटों जाम में फंसे रहे
  • जाम को खुलवाने के लिए कई जगह तो ट्रैफिक पुलिस ही नहीं दिखाई दी।
  • वहीं, बारिश के चलते शहर में जलभराव ने लोगों की परेशानी बढ़ी दी। नालियों की सफाई न होने के कारण बारिश के दौरान गंदा पानी सड़क पर आने से लोग परेशान रहे।

जानकारी के मुताबिक, बारिश से दिल्ली में भी जगह-जगह पानी भरने से गाड़ियों की रफ्तार भी थम गई, जिसकी वजह से लोगों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ा। बारिश की वजह से कैब कंपनियों ने किराए में इजाफा कर दिया। सड़कों पर कैब की संख्या कम होने की वजह से यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ा।

मिली सूचना के मुताबिक, दिल्ली में रिंग रोड धौला कुआं, भैरों रोड, मथुरा रोड, तीन मूर्ति गोल चक्कर, इग्नू रोड, डीएनडी, आश्रम चौक, रिंग रोड महारानी बाग, लाजपतनगर, सराय काले खां, राजा गार्डन, आनंद विहार, मायापुरी व जिमखाना में जाम की स्थिति बन गई। इसके अलावा, गाजियाबाद के मोहन नगर, नोएडा में महामाया फ्लाईओवर के साथ पास भीषण जाम लग गया।

वहीं, जल जमाव के कारण गड़गांव के कई इलाकों में ट्रैफिक जाम हो गया। दिल्ली के साथ नोएडा, गुड़गांव, गाजियाबाद और फरीदाबाद के कई इलाकों में नाले का पानी भर गया।

मौसम विभाग ने पहले ही इस बात की संभावना जताई थी कि आने वाले दिनों में दिल्ली और आसपास के इलाकों में बारिश हो सकती है। फिलहाल 26 अगस्त तक मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहेगा और रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।

आगे बढ़ रही हैं नमी वाली हवाएं

स्काइमेट के मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती हवाओं का मौसम बना हुआ है। इस तरह की गतिविधियों के कारण पूर्वी दिशा से दिल्ली और आसपास के इलाकों की ओर नमी वाली हवाएं आगे बढ़ रही हैं। इस तरह मौसम की स्थिति अगले कुछ दिनों तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में बनी रहेगी।

इस दौरान अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 से 28 डिग्री तक रहने का अनुमान है। दिल्ली में अगस्त महीने में इस साल 81 मिमि कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के आकड़ों के मुताबिक, इस साल अगस्त में सिर्फ 76.1 मिमी ही बारिश हुई है। जबकि 157.1 बारिश होनी चाहिए थी। दिल्ली के कई कॉलोनियों में अच्छी बारिश नहीं हुई है।

कमजोर रहा है दिल्ली में मानसून

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दिल्ली में मानसून की सक्रियता कमजोर रही है। इसकी वजह से अगस्त महीने में अच्छी बारिश नहीं हुई। मानसून ज्यादातर दक्षिण व मध्य भारत में ही सक्रिय रहा। साथ ही उत्तर पश्चिमी दिशा से हल्की सूखी हवाएं भी दिल्ली में आती रहीं जिससे दिल्ली में अच्छी बारिश नहीं हुई।