सितंबर में घूम लें इस खूबसूरत जगह, नहीं अगले 6 माह तक नहीं मिलेगा मौका

लद्दाख घूमने का मन है, तो देर न करें, क्योंकि अभी चूक गए, तो फिर अगले 6 महीनों तक यहां जाने का मौका खो देंगे। अगर खर्च की चिंता सता रही है, तो हम आपको को कुछ टिप्स दे रहे हैं, जिससे आप बजट को कंट्रोल में रख सकते हैं।

दरअसल लद्दाख जाने के लिए टाइमिंग के साथ ही प्लानिंग और पैकेजिंग अहम होती है। इसके लिए 10 दिनों का टूर बनाएं। इससे आप 20,000 रुपए में घूमकर वापस आय सकते हैं। लेकिन यह सफर बहुत लक्जरी नहीं होगा।

लद्दाख जाने के लिए दिल्ली से कम से कम दस दिन लग जाते हैं। यहां जाने के लिए साथ साथ में गर्म कपड़े लेकर जरुर जाएं। लद्दाख जाकर भी इन्हें खरीद सकते हैं। लेकिन इससे आपका बजट बिगड़ सकता है। वहीं साथ में खाने के लिए ड्राई फ्रूट लेकर जाएं।

कैसे जाएं-

पहला दिन (लद्दाख) –

सफर की शुरुआत के लिए दिल्ली पहला डेस्टिनेशन होना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले दिल्ली पहुंचना होगा।

दूसरा दिन (मनाली)-

दिल्ली के बाद अगला स्टॉप मनाली होगा। इसके लिए दिल्ली के ISBT कश्मीरी गेट बस स्टॉप से बस ले सकते हैं। यहां से हिमाचल रोडवेज और प्राइवेट दोनों तरह की बसें मिलती है। इस तरह 12 से 15 घंटे में मनाली पहुंच सकते हैं।  हिमाचल रोडवेज से मनाली बस स्टैंड तक का किराया 700 रुपए होगा।

तीसरा दिन (केलांग)

मनाली में रात गुजारने के बाद सुबह केलांग के लिए निकाल सकते हैं। इसके लिए आपको दोबारा न्यू मनाली बस स्टैंड जाना होगा।  बस 180 रुपए में केलांग पहुंचाएगी। केलांग पहुंचकर 500 रुपए में एक गेस्ट हाउस मिल जाएगा। यहां से लाहुल के बेहतरीन नजारों का दीदार किया जा सकता है।

चौथा दिन (लेह)-

केलांग से अगले दिन सुबह पांच बजे ही स्टेट ट्रांसपोर्ट बस से लेह के लिए निकलना बेहतर होगा। इसका टिकट 525 रुपए का होगा। इस तरह आप शाम के सात बजे तक लेह पहुंच जाएंगे। लेह बस स्टैंड से चांग्पा के लिए वेहिकल किराए पर ले, जो 350 रुपए में मिल जाएगा। चांग्पा में लद्दाखी किराए पर घर मिल जाएंगे। इसके लिए एक व्यक्ति को 500 रुपए किराया देना होगा।

पांचवा दिन (नुब्रा वैली)-

चांग्पा में रात रुकने के बाद अगली सुबह करीब आठ बजे नुब्रा वैली के लिए निकलें। इसके लिए पहले से शेयरिंग वेहिकल में सीट जरुर बुक कर लें। एक सीट के लिए 2 से ढ़ाई हजार रुपए देने होंगे। इसके अलावा इंट्री और एनवायरनमेंट फीस के लिए 100 रुपए देने होंगे। नुब्रा वेली में खारदुंग ला पास जाएं, जो कि विश्व की सबसे ऊंचाई वाली मोटरेबल रोड है। साथ ही दिश्कित गांव जाएं, जो कि एक मोनेस्ट्री गांव है। यहां एक बुद्ध का स्टैच्यू है। नुब्रा वैली घूमने के बाद रात गुजारने के लिए लेह लौट आएं।

छठा दिन (पैंगोंग झील)-

पैंगोंग झील जाने के लिए सरकारी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए दो से ढ़ाई हजार किराया लगेगा। अगर आप यहां के लिए सुबह आठ बजे निकलेंगे, तो दोपहर एक बजे पहुंचेंगे। यहां घूमने के बाद रात लेह में ही गुजारें।

सातवां दिन (लेह)-

लेह के आसपास का एरिया कवर करने के बाद अगली सुबह लेह स्थित शांति स्तूप का प्लान बनाया जा सकता है। इसके अलावा लेह पैलेस जा सकते हैं। इसकी इंट्री के लिए 100 रुपए लगेगे।

आठवा दिन- केलांग

अगले दिन सुबह लेह से चांग्पा के लिए कैब ले सकते हैं। जो कि 350 रुपए में मिलेगी। फिर चांग्पा से केलांग के लिए बस ले,जो शाम पांच बजे पहुंचाएगी। बस का किराया 580 रुपए होगा। यहां 500 रुपए का एक रुम लेकर रात रुके।

नौवां दिन मनाली-

सुबह केलांग से मनाली के लिए बस ले, जो 180 रुपए में मिल किराया लेगी। मनाली में फ्रेश होने के बाद दिल्ली के लिए बस ले, जो 700 रुपए में दिल्ली पहुंचा देगी।

दसवां दिन (दिल्ली)

अगले दिन आप दिल्ली में होंगे, जहां से आप देश की अन्य शहरों के लिए ट्रेन ले सकते हैं।

अतिरिक्त खर्च

इस सभी खर्च में खाने का खर्च शामिल नहीं है। ऐसे में इसे अपने खर्च में जोड़कर चले। आमतौर पर एक दिन में खाने पर 500 रुपए खर्च हो जाते हैं। ऐसे में दस दिनों का अतिरिक्त खर्च 5 हजार जोड़कर चलें।

अब नहीं मिलेंगी घरों में इस्तेमाल होने वाली सिर दर्द,जुकाम की यह 300 आम दवाएं , सरकार ने लगया बैन

अब मेडिकल स्टोर पर सिरदर्द, जुकाम, दस्त, पेट दर्द जैसी 300 से अधिक दवाएं नहीं मिलेंगी। केंद्र सरकार ने ऐसी दवाओं पर रोक लगा दी है। इन दवाओं पर कई ऐसी दवाएं हैं, जिनका नाम प्रत्येक व्यक्ति को पता है। यह दवाएं डॉक्टर के पर्चे के बिना दुकान पर आसानी से मिल जाती है। इन दवाओं का कारोबार करीब 4 हजार करोड़ रुपये का है। यह दवाएं फिक्सड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) हैं।

6 हजार से अधिक हैं ब्रांड

इन दवाओं की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग घरों में यह दवाएं हमेशा से रखते आ रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इनका सस्ता होना और मामूली पीड़ा के लिए इनका सेवन करना।

देश में इन दवाओं के करीब 6 हजार से अधिक ब्रांड हैं, जिनमें से सेरिडॉन, डीकोल्ड, फेंसिडिल, जिंटाप काफी प्रसिद्ध हैं। इस कदम से सन फार्मा, सिप्ला, वॉकहार्ट और फाइजर जैसी कई फार्मा कंपनियों को तगड़ा झटका लगा है।

लिस्ट में शामिल हैं 343 दवाएं

इस लिस्ट में 343 दवाएं शामिल हैं, जिनको एबॉट, पीरामल, मैक्लिऑड्स, सिप्ला और ल्यूपिन जैसी दवा निर्माता कंपनियां बनाती हैं। ड्रग टेक्नोलॉजी एडवाइजरी बोर्ड (डीएटीबी) ने मंत्रालय को इस तरह की सिफारिश दी है। डीएटीबी ने यह सिफारिशें सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल दिए गए आदेश पर दी हैं। अब सरकार ने इसे बैन करने की अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि लग रहा है कि कई कंपनियां सरकार के इस आदेश को कोर्ट में भी चुनौती दे सकती हैं।

मेडिकल स्टोर पर बिक्री होगी गैरकानूनी

इन 343 दवाओं पर प्रतिबंध लगाने के बाद मेडिकल स्टोर पर इनकी बिक्री गैरकानूनी होगी। अगर किसी मेडिकल स्टोर पर यह दवाएं बिक्री होते हुए पाएं गई तो फिर दवा निरीक्षक अपनी तरफ से उक्त मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा सकता है।

ऐसे बनाएं घर पर साइलेज,पुरे साल के लिए हरे चारे की टेंशन ख़तम

अपने दुधारु पशुओं को पूरे साल हरा चारा उपलब्ध करा पाना पशुपालकों के लिए एक बड़ी चुनोती बनता जा रहा है। ऐसे में पशुपालक घर पर ही साइलेज बनाकर अपने पशुओं को पूरे साल हरा चारा उपलब्ध करा सकते है। इसके लिए सरकारी मदद भी मिलती है।साइलेज से पशुओं के दुग्ध उत्पादन भी अच्छा होता है।इसमें ज्यादा लागत भी नहीं आती है।

शुरुआत में पशु साइलेज ज्यादा नहीं खा पाता है लेकिन बार-बार देने से वह उसे चाव से खाने लगता है। जब चारे की कमी हो तो साइलेज खिलाकर पशुओं का दूध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। पशु को साइलेज खिलाने के बाद बचे हुए हिस्से को भी हटा देना चाहिए। अगर भूसा दे रहे हो तो उस हिस्से को उस में मिलाकर दें।

अच्छे दुग्ध उत्पादन के लिए दुधारु पशुओं के लिए पौष्टिक दाने और चारे के साथ हरा चारा खिलाना बहुत जरुरी है। हरे चारा पशुओं के अंदर पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है। एक दुधारू पशु जिस का औसत वजन 550 किलोग्राम हो, उसे 25 किलोग्राम की मात्रा में साइलेज खिलाया जा सकता है। भेड़-बकरियों को खिलाई जाने वाली मात्रा 5 किलोग्राम तक रखी जाती है।

साइलेज बनाने के लिए सरकार द्वारा यूरिया ट्रीटमेंट किट और साइलेज बनाने के लिए किट दी जाती है। अगर कोई पशुपालक साइलेज बनाना चाहता है तो उसका प्रशिक्षण भी ले सकता है। साइजेल बनाने लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK Center) में भी प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

पशुपालक इस तरह बना सकते है साइलेज

साइलेज बनाने के लिए जिस भी हरे चारे का इस्तेमाल आप कर रहे हो उसको 2 से 5 सेन्टीमीटर के टुकड़ों में काट कर कुटटी बना लेना चाहिए। ताकि ज्यादा से ज्यादा चारा साइलो पिट में दबा कर भरा जा सके। अब उस कुट्टी किए हुए चारे को दबा-दबा भर दें।

ताकि बरसात का पानी अंदर न जा सके। फिर इसके ऊपर पोलीथीन की शीट बिछाकर ऊपर से 18-20 सेमी मोटी मिट्टी की पर्त बिछा देनी चाहिए। इस परत को गोबर व चिकनी मिट्टी से लीप दिया जाता है और दरारें पड़ जाने पर उन्हें मिट्टी से बन्द करते रहना चाहिए ताकि हवा व पानी गड्ढे में न पहुंच सके।

लगभग 50 से 60 दिनों में यह साइलेज बनकर तैयार हो जाता है। गड्ढे को एक तरफ से खोलकर मिट्टी और पोलोथीन शीट हटाकर आवश्यकतानुसार पशु को खिलाया जा सकता है। साइलेज को निकालकर गड्ढे को फिर से पोलीथीन शीट और मिटटी से ढ़क देना चाहिए और धीरे-धीरे पशुओं केा इसका स्वाद लग जाने पर इसकी मात्रा 20-30 किलो ग्राम पति पशु तक बढ़ायी जा सकती है ।

किन-किन फसलों से बना सकते है साइलेज

साइलेज बनाने के लिए सभी घासों से या जिन फसलों में घुलनशील कार्बोहार्इडे्रटस अधिक मात्रा में होती हैं जैसे ज्वार मक्की, गिन्नी घास नेपियर सिटीरिया आदि से तैयार किया जा सकता है। साइलेज बनाते समय चारे में नमी की मात्रा 55 प्रतिशत तक होनी चाहिए।

साइलेज जिन गड्ढ़ों में भरा जाता है। उन गड्ढ़ों को साइलोपिटस कहते है। गड्ढा (साइलो) ऊंचा होना चाहिए और इसे काफी सख्त बना लेना चाहिए। साइलो के फर्श और दीवारें पक्की बनानी चाहिए और अगर पशुपालक पक्की नहीं कर सकता तो लिपाई भी कर सकता है।

इन बातों को रखें ध्यान

  • साइलेज बनाने के लिए जो यूरिया है उसको साफ पानी में और सही मात्रा के साथ बनाना चाहिए।
  • घोल में यूरिया पूरी तरह से घुल जाना चाहिए।
  • पूरी तरह जब तैयार हो जाए तभी पशुओं को साइलेज खिलाएं।
  • यूरिया के घोल का चारे के ऊपर समान रूप से छिड़काव करना चाहिए।

इंडिया की मार्केट में मिल रही है फ़ोन की नकली एक्सेसरीज, इस तरह करे पहचान

इंडिया में स्मार्टफोन और एक्सेसरीज का मार्केट लगातार बढ़ रहा है। यहां पर फेक गैजेट की भी बड़ी रेंज मौजूद है। इन्हें देखकर नकली होने का का पता लगाना भी मुश्किल है। ऐसे में यदि आप महंगा स्मार्टफोन या गैजेट खरीद रहे हैं और वो फेक मॉडल हुआ, तब बाद में पछताना पड़ेगा। ऐसे में आपको नकली और असली की पहचान पता होना चाहिए।

फेक एक्सेसरीज

नकली प्रोडक्ट को फेक और डुप्लिकेट भी कहा जाता है। ये देखने में हूबहू रियल या ऑरिजनल की तरह होते हैं। फेक प्रोडक्ट को बनाने में इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि ये ऑरिजनल की तरह दिखे। इसके लिए बॉडी, कलर, लोगो हर चीज मेहनत की जाती है। यानी इन्हें देखने पर इस बात का पता लगाना मुश्किल होता है कि ये असली नहीं है। हालांकि, जब इन्हें इस्तेमाल में लाया जाता है तब पोल खुल जाती है।

मौसम विभाग ने दी चेतावनी, इन राज्यों में होगी भारी बारिश

दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में अगले दो घंटों में तेज हवा के साथ बारिश आने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने अगले 2 घंटे में दिल्ली-एनसीआर में तेज हवा के साथ बारिश की चेतावनी दी है।

मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली के साथ मेरठ, गाजियाबाद, झज्जर, नोएडा, खुर्जा, बुलंदशहर, बिजनौर और अलीगढ़ में बारिश हो सकती है। वहीं, मौसम विभाग ने शुक्रवार के साथ शनिवार को भी अच्छी बारिश होने की संभावना जताई है। हालांकि 10 और 11 सितंबर से मौसम शुष्क होना शुरू हो जाएगा।

इससे पहले कई दिन की राहत के बाद बृहस्पतिवार को तेज धूप खिली और उमस ने भी दिल्लीवासियों को पसीने से तर-बतर किया, लेकिन शाम को अचानक मौसम बदला और झमाझम बारिश ने फिर से दिल्ली की फिजा बदल दी। मौसम ठंडा तो हुआ, लेकिन जलभराव और जाम ने फिर से परेशान किया।

स्काईमेट वेदर के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आगे बढ़ते हुए यह बारिश दिल्ली पहुंची थी। स्काईमेट के मुख्य मौसम विज्ञानी महेश पलावत के अनुसार इस तरह की अचानक बारिश की संभावना दो से तीन दिन तक बनी हुई है।

मानसून टर्फ इस समय उत्तर पश्चिम के मैदानी इलाकों की तरफ है और लगातार शिफ्ट कर रहा है। हरियाणा के ऊपर साइक्लोनिंग सकरुलेशन भी बना हुआ है। इसी वजह से इस तरह की बारिश हो रही है।

दिल्ली में शाम पांच बजे शुरू हुई बारिश रात 8 बजे तक रुक-रुक कर जारी रही।  इससे दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में मुख्य मार्गो पर पानी भर गया। एमबी रोड पर प्रहलादपुर रेलवे अंडरपास में पानी भर जाने से मार्ग बाधित हो गया। इस कारण अंडरपास के दोनों ओर से जाम लग गया। प्रहलादपुर अंडरपास में जलभराव के कारण महरौली से बदरपुर जाने वाले मार्ग पर साकेत से लेकर बदरपुर तक यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा।

अब इस मशीन से दो मिंट में जाने अपने खेत की फसल का हाल

इंसान के पास अपने शरीर का बुखार चैक करने के लिए थर्मामीटर और डायबीटिज चैक करने वाली मशीन भी है। शरीर में कैल्सियम की कमी है ये पता करने वाली मशीनें भी है। लेकिन खेत में खड़ी फसल को किस चीज की जरूरत है, क्या उसे खांसी हुई है या बुखार यानी उसे पानी की जरूरत है अभी या फिर किसी दवा की, इसे जांचने वाली मशीन की तलाश किसानों को लंबे समय से थी।

ऐसी ही एक छोटी सी मशीन को इस्तेमाल कर हरियाणा के किसान लवप्रीत सिंह फसल को होने वाले नुकसान से आसानी से बच जाते हैं और ज्यादा पैदावार कर ज्यादा कमाई कर रहे हैं।

बुआई और रोपाई के समय ही खेतों को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। लेकिन तब बरसात नहीं होती। फिर जब फसल की कटाई का वक्त आता है, तो अनचाही बरसात सब बर्बाद कर देती है। सालों से किसान को इसी समस्या का सामना करना पड़ता आ रहा है।

लेकिन हरियाणा के किसान लवप्रीत सिंह को परेशानी से बच जाते हैं। दरअसल, ग्रीन सीकर जैसे छोटे गैजेट्स फसलों के लिए सेंसर की तरह काम करते हैं। लवप्रीत इसी मशीन का इस्तेमाल करते हैं। वो जैसे ही इस मशीन को खेत में खड़ी फसल के किसी भी हिस्से पर ले जाते हैं, तो मशीन से लाल रंग की तरंगे यानी रोशनी निकलती है।

फसल का स्वास्थ्य जांचने वाली मशीन

ये तरंगे पौधों से टकराकर खत्म हो जाती हैं, लेकिन खत्म होने से पहले वो मशीन को बता देती हैं कि फसल को किस चीज की अभी कमी है। इसी मदद से लवप्रीत खेत की मिट्टी में नाइट्रोजन की स्थिति का भी पता तुरंत लगा लेते हैं।

किसान लवप्रीत अपने 50 एकड़ के खेत की फसलों के लिए ऐसी कई नई तकनीक वाली मशीनें इस्तेमाल करते हैं। यह उनमें से एक है।

लवप्रीत के मुताबिक तकनीक की वजह से वो मौसम की बेहतर भविष्यवाणी जान लेते हैं। जिसकी वजह से वो बीजारोपण करने के सही समय और कीटनाशकों के छिकड़ने के समय की सही योजना आसानी से पहले ही बना लेते हैं।

लेकिन पहले ऐसा नहीं हो पाता था। इस वजह से उनको पहले मजदूरों पर अधिक खर्च करना पड़ता था। फिर गलत समय पर बरसात, फसल को बर्बाद कर दिया करती थी।

बाकी किसान छोटी जोत वाले हैं इसलिए वो 40 हजार रूपए की कीमत वाली ग्रीनसीकर मशीन को नहीं खरीद पाते। ऐसे में लोकर कृषि समितियों ने इनको खरीद लिया है और वो अब बाकी छोटे किसानों को इसे फ्री में इस्तेमाल करने देती है ताकि किसान को फायदा हो सके। ऐसे करता है काम

इसके सेंसर में लाल इंफ्रारेड लाइट लगी होती है जो पौधे के ऊपर पढ़ने वाले हर प्रकार के प्रकाश का का विश्लेषण कर पौधे के बारे में जानकारी हांसिल करती है ।सेंसर अपनी रिपोर्ट इस यंत्र की ऐल.सी.डी स्क्रीन पर देता है । जो NDVI (रीडिंग 0.00 से 0.99) स्क्रीन पर दिखाई देती है ।

रीडिंग के हिसाब से हम पौधे की सेहत के बारे में जान सकते है । इसको Connected Farm™ scout ऐप के साथ कनेक्ट किआ जा सकता है जिस से अगर कोई घर से दूर भी हो तो भी अपने खेत के बारे में जानकारी हांसिल कर सकता है ।

बाजार में मिलने वाले नकली दूध की आसानी से ऐसे करें पहचान

आज के समय में बाजारों में नकली चीजों की भरमार है और इन्हीं चीजों के इस्तेमाल से हमारी जिंदगी बीमारियों से घिर गई है. आपको शायद न पता हो, लेकिन इन मिलावट वाली चीजों के इस्तेमाल से कम उम्र में ही जानलेवा बीमारियां पैदा हो जाती हैं.

आज के समय में चाहे आप हरी सब्जियां ले रहे हों, फल खरीद रहे हों या फिर दूध हीं क्यों ना ले रहे हों, कोई भी चीज आपको असली नहीं मिलेगी. लेकिन हमारी मजबूरी है कि हमें ये सारी चीजें खरीदनी पड़ती हैं और इस्तेमाल करनी पड़ती हैं. यूं तो इन चीजों के असली और नकली होने की पहचान करना थोड़ा कठिन होता है, फिर भी हम आपको नकली दूध की पहचान का आसान तरीका बता रहे हैं.

ऐसे जान सकते हैं आप असली और नकली दूध का फर्क

  • नकली दूध की पहचान करने के लिए उसे सूंघें. अगर आपको लगता है कि दूध से साबुन जैसी महक आ रही है, तो दूध सिंथेटिक यानी की नकली है. जबकि असली दूध से ऐसी कोई गंध नहीं आती.
  • आपको बता दें कि दूध असली है तो उसका स्वाद मीठा होगा, लेकिन अगर नकली दूध है तो इसका स्वाद मीठा नहीं बल्कि कड़वा होगा.
  •  दूध में पानी की मिलावट की पहचान आप इस तरह से कर सकते हैं. दूध की कुछ बूंदें फर्श पर गिरा कर देखें, अगर दूध बहने लगता है और सफेद धार का निशान बनता है, तो दूध में पानी की कोई मिलावट नहीं है.

  •  हम आपको ये भी बता दें कि असली दूध को अगर आप अपने हाथों में लेकर रगड़ेंगे तो उसमें कोई चिकनाहट नहीं होगी. लेकिन अगर आपक नकली दूध को रगड़ेंगे तो डिटरजेंट जैसी चिकनाहट महसूस होगी.
  •  असली दूध को जब आप उबालेंगे तो उसका रंग नहीं बदलेगा. जबकि नकली दूध को उबालने पर उसका रंग हल्का पीला पड़ जाता है.

फोन की बैटरी के बारे में बोले जाते हैं 5 झूठ, दुनि‍या मानती है सच

स्‍मार्टफोन का बाजार दिन ब दिन बड़ा होता जा रहा है। ऐसे में आज हर आदमी के पास स्मार्टफोन है। वहीं, आज की डेट में जो सबे बड़ी दिक्कत है वो है स्मार्टफोन की बैटरी। क्योंकि अगर आपने इंटरनेट चला रखा है तो यह दिन भर बहुत मुश्किल से चलती है।

ऐसे में स्‍मार्टफोन के लि‍ए सबसे जरूरी चीज है उसकी बैटरी, जि‍सका ध्‍यान रखना बहुत जरूरी है। क्‍योंकि‍ मोबाइल फोन की बैटरी को लेकर कई मिथ हैं। ऐसे में जब तक आपके फोन का चार्जर ठीक से काम कर रहा है तब तक बैटरी को कोई नुकसान नहीं होगा, फिर चाहे चार्जर किसी भी कंपनी का हो। वहीं, अगर ऑरिजनल चार्जर भी खराब हो तो बैटरी खराब हो सकती है।

क्‍या है झूठ

ज्‍यादा चार्ज करने से खराब हो जाती है बैटरी।

क्‍या है सही

अक्‍सर ऐसा कहा जाता है कि‍ बैटरी को ज्‍यादा चार्ज करो तो वह खराब हो जाती है। लेकि‍न ऐसा नहीं है। क्‍योंकि‍ आजकल स्‍मार्टफोन में आने वाली बैटरी चार्जि‍ंग फुल होने पर खुद ही करंट लेना बंद कर देती हैं। ऐसे में यह एकदम झूठ है कि‍ ज्‍यादा चार्ज करने से बैटरी खराब होती है। हालांकि‍ लगातार चार्ज पर लगे रहने से बि‍जली जरूर खर्च होगी।

क्‍या है झूठ

पूरी बैटरी खत्‍म होने के बाद ही चार्ज करें।

क्‍या है सही

यह गलत धारणा है। अगर आप भी ऐसा सोचते हैं और बैटरी को चार्ज करने के लि‍ए उसके जीरो पर्सेंट होने का इंतजार कर रहे हैं तो ऐसा न करें। इससे बैटरी की लाइफ कम होती है।

क्‍या है झूठ

बार-बार स्‍वि‍च ऑफ करने से खराब होती है बैटरी।

क्‍या है सही

ऐसा नहीं होता। ये बैटरी का नॉर्मल नेचर है कि‍ अगर आप फोन को स्‍वि‍च ऑफ कर देंगे तो एक तय समय के बाद उसकी बैटरी खुद ही खत्‍म हो जाएगी।

 क्‍या है झूठ

बार-बार चार्ज करने से बैटरी खराब होती है।

क्‍या है सही

स्‍मार्टफोन का बैटरी बैकअप कम होता है। वहीं, इंटरनेट यूज और बहुत सारे फीचर्स के चलते बैटरी जल्‍दी खत्‍म होती है। ऐसे में यूजर को बार-बार बैटरी चार्ज करनी पड़ती है। इससे बैटरी पर कोई असर नहीं पड़ता।

क्‍या है झूठ

नए फोन को ऑफ करके चार्ज करें।

क्‍या है सही

नया फोन खरीदने पर हर कोई यह सलाह देता है कि‍ आप फोन को ऑफ करके फुल चार्ज करें। जबकि‍ ऐसा करने की जरूरत नहीं है। इससे कोई फायदा नहीं होता। बल्‍कि‍ फोन में जि‍तनी बैटरी आती है आप उसे यूज करें और फि‍र उसे खत्‍म होने पर चार्ज करें और तब भी आपको फोन ऑफ करने की जरूरत नहीं है।

Youtube की वीडियो देखकर आप कमा सकते है 30000 महीना , ये है तरीका

अगर Youtube पर वीडियो देखना पसंद करते हैं, तो इसी शौक का इस्‍तेमाल कर आप हर महीने 30 हजार रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। इस काम को करने के लिए आपके पास सिर्फ दो चीजों का होना जरूरी है। एक इंटरनेट कनेक्‍शन और दूसरा, वीडियो देखने के लिए रोजाना कुछ समय।

इन 3 टिप्‍स से रहेंगे फायदे में

इस काम को हाथ में लेने से पहले अपनी सुविधानुसार एक या दो साइटों का सेलेक्‍शन कर उन्‍हीं पर फोकस्‍ड रहें। इससे आप दोनों को ज्‍यादा समय दे पाएंगे, तो बेहतर इनकम हासिल कर पाएंगे।
ये ऑनलाइन साइटें सेकंडों के हिसाब से पेमेंट करती हैं। ऐसे में आप जितनी ज्‍यादा वीडियोज देखेंगे, उतना ही ज्‍यादा आपको फायदा होगा। इसलिए हर दिन दो से पांच घंटे इस काम के लिए तय कर लें और इस बीच इन साइटों पर रहने के अलावा कुछ भी न करें।
इस पार्ट टाइम काम से तुरंत कमाई नहीं होती। एक अच्‍छी रकम हासिल करने के लिए जरूरी है कि आप लगातार काम करें और संयम रखें।

साइट : पेड2यूट्यूब
कमाई : 200 रुपए प्रति घंटे

कैसे करें कमाई

इस साइट पर आपको 30 सेकंड का यूट्यूब वीडियो देखने, उस पर कमेंट करने के पैसे मिलते हैं। कमाई को बढ़ाने के लिए यूट्यूब चैनल को सबस्‍क्राइब व दोस्‍तों को रेफर किया जा सकता है। इससे आप 200 रुपए तक प्रति घंटे की कमाई कर सकते हैं। आप चाहें तो ये सब काम एक ही बार में कर सकते हैं या फिर चाहें तो अलग-अलग समय पर बैठकर इस काम को पूरा करें। साइट के अकाउंट में 670 रुपए की रकम जमा होने के सात दिन बाद पेपल अकाउंट से आपको पेमेंट कर दी जाती है।

साइट – स्वैगबक्स
कमाई –250 रुपए प्रति घंटे

कैसे करें कमाई –

स्वैगबक्स में वीडियो देखने के अलावा आप सर्वे के जरिये भी पैसे कमा सकते हैं। हर क्लिक और वीडियो देखने के लिए स्वैगबक्स एक एसबी से लेकर 30 एसबी तक प्वाइंट्स देता है।
500 एसबी कमा लेने के बाद आप 250 रुपए का फ्लिपकार्ट और एमेजन का गिफ्ट कार्ड हासिल कर सकते हैं और अपनी मनपसंद चीज खरीद सकते हैं। जितने ज्यादा एसबी प्वाइंट होंगे, गिफ्ट कार्ड भी उतनी ही ज्यादा रकम का आप हासिल कर पाएंगे।

साइट : यू-क्‍यूबेज
कमाई : 67 रुपए प्रति घंटे

कैसे करें कमाई

एडवरटाइजिंग एजेंसी की यह साइट आपको प्रति क्लिक के हिसाब से 0.005 सेंट (यूएस डॉलर) का भुगतान करती है। ऐसे में अगर आप एक दिन में वीडियो, विज्ञापन और वेबसाइट पेज पर 200 क्लिक भी करते हैं, तो आप 67 रुपए प्रति‍ घंटे कमा सकते हैं। रेफरेंस देकर और साइट पर दिखने वाली किसी वेबसाइट पर खरीदारी कर आप अपनी कमाई को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

साइट : सक्सेसबक्स
कमाई : 67 रुपए प्रति घंटे

कैसे करें कमाई

सक्सेसबक्स पर आपको सिर्फ वीडियो देखने के लिए पैसे नहीं मिलते, बल्कि साइन अप और सिर्फ क्लिक करने के लिए भी पैसे मिलते हैं। एड एजेंसी की यह साइट हर क्लिक के लिए 0.1 सेंट से एक डॉलर तक की कमाई करने का मौका देती है। साइट के बारे में सबसे अच्छी बात ये है कि यह आपके अकाउंट में कम से कम 67 रुपए जमा होते ही, पेपल के अकाउंट में भेज देती है। जिसे आप चाहें तो निकाल लें या फिर कमाई को बढ़ाते रहें।

ऐप – स्‍लाइड जॉय
कमाई : 33 रुपए प्रति घंटे

कैसे करें कमाई

इस ऐप को अपने स्‍मार्टफोन में इंस्‍टॉल करने के बाद आप कुछ न भी करेंगे, तो भी पैसे कमाएंगे। इस ऐप से हर घंटे 33 रुपए तक कमाए जा सकते हैं। इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत है कि यह सिर्फ आपके स्मार्टफोन के लॉकस्‍क्रीन का इस्‍तेमाल करती है। मतलब जब भी आपके फोन का स्‍क्रीन लॉक होगा, तब ही उस पर एड चलता रहेगा और अनलॉक करने के लिए स्‍वाइप करते ही आपके अकाउंट में पैसे क्रेडिट हो जाएंगे।

डॉग फार्मिंग से हो सकती है 5 लाख रु. सालाना की कमाई, सिर्फ 50000 में ऐसे शुरू करें बिज़नेस

अगर आप मात्र 40 से 50 हजार रुपए में ऐसा कोई बिजनेस करने की सोच रहे हैं, जिसमें मेहनत भी ज्‍यादा न हो और साल भर में 4 से 5 लाख रुपए की कमाई हो जाए तो आप डॉग फार्मिंग करके आसानी से ऐसा कर सकते हैं।

यानी कि एक कुत्‍ता (फीमेल डॉग) पालिए और साल भर में 10 से 12 पपी बेच कर कमाई की जाए। इसके लिए आपको अलग से जगह लेने की भी जरूरत नहीं है, आप घर पर भी यह काम कर सकते हैं। पिछले कुछ सालों में डॉग फार्मिंग मेट्रो सिटीज ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों में भी तेजी से फैल रहा है। आज हम आपको इस बिजनेस के बारे में विस्‍तार से जानकारी देंगे।

कैसे करें शुरुआत

कुछ खास किस्‍म के बेहद खूबसूरत से दिखने वाले नस्‍ल के कुत्‍तों को घर में रखने का चलन बेहद तेजी से बढ़ रहा है। ये कुत्‍ते न केवल आपके साथ खेल कर टेंशन फ्री रखने में मदद करते हैं और आपके बच्‍चों का मनोरंजन करते हैं।

किसी एक खास ब्रीड की फीमेल डॉग बाजार में 40 से 50 हजार रुपए मिल जाती है। बस आपको यह फीमेल डॉग खरीदनी है और उसे पालना है और कुछ समय बाद इन्‍सेमनेट (गर्भाधन) कराकर आप कुछ समय बाद पैदा होने वाले बच्‍चे बेचकर कमाई कर सकते हैं।

4से 6 माह का लगता है समय

आप जब फीमेल डॉग खरीदें तो उसकी उम्र लगभग 6 माह होनी चाहिए, जो 10 महीने की उम्र होने तक हीट पर आती है और मेल डॉग से 20 हजार रुपए या एक बच्‍चे के बदले मीटिंग करवाकर गर्भाधान करवा सकते हैं। 55 से 60 दिन के बाद बच्‍चे होंगे, जिन्‍हें दो महीने बाद बेचा जा सकता है। इस काम में आप सोशल मीडिया या ऑनलाइन मार्केटिंग का सहारा ले सकते हैं, जैसे ही, आप पपी बेचने की सूचना देंगे, आपके पास ऑर्डर आने लगेंगे।

फीडिंग का खर्च केवल 4 हजार रुपए

आपके लिए यह जानना जरूरी है कि यदि आप ऐसी कुत्‍तों की फीडिंग (खाने) पर कितना खर्च आएगा। छोटे पपी को चार बार आधा कप, रेडीमेड फूड पेडीग्री, डूल्स, रालल्स कैनॉल दिया जाता है। इसमें डूल्स की 20 किलो का 3200रुपए में मिलने वाला फूड एक पपी के लिए दो साल का पर्याप्त भोजन है।

इसके अलावा 700रुपए में पार्गोवायरस व डिस्टेंपर के साथ एंटी रेबिज के प्रति वर्ष इंजेक्शन लगते है। इसके अलावा किसी भी जेनरिक मेडिकल स्टोर से हड्‌डी के लिए कैलसियम, पाचन के लिए लीवोजन सीरप और चमकदार बाल के लिए ईवीयॅन विटामीन ई की कैपसूल या फीश ऑयल जो बेहद सस्ते रेट में है लेकर सुबह शाम निधाार्रित मात्रा में दे सकते है।

किस ब्रीड की क्‍या होती है कीमत

शिह त्ज-चाइना की हाइट 8-11इंच होती है, जिसका वेट 6-8किलो होता है। वह 10-18 साल से जीवित रहती है। उसकी कीमत 40 से 50 हजार रुपए है। यह फीमेल डॉग साल में दो बार ब्रीड कराने पर 10 से 12 बच्‍चों का जन्‍म देती है। एक पपी की मार्केट में 40 से 50 हजार रुपए है। मतलब, आप साल भर में 4 से 6 लाख रुपए कमा सकते हैं।

बीगल-इंगलैंड की कीमत 30 से 40 हजार रुपए हैजिसकी हाइट 8-11इंच, वेट 8-10किलो तक,उम्र 13-14 साल होती है। दो बार ब्रीड करके 10 से 12 पपी का जन्‍म होता हैजिन्‍हें बाजार में 30 से 40 हजार रुपए में बेचा जा सकता है।