इस तरीके से 20 से 22 रुपए सस्ता पेट्रोल खरीद रहे असम के लोग

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आम के साथ-साथ खास आदमी भी परेशान है। इस समय देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर चल रही हैं। इस कारण लोगों का मासिक बजट गड़बड़ा गया है। दिल्ली में इस समय पेट्रोल की कीमतें 77.97 रुपए प्रति लीटर चल रही हैं जबकि डीजल 68.90 रुपए प्रति लीटर पर बिक रहा है।

लेकिन देश का एक राज्य एेसा भी है जिन्होंने महंगे पेट्रोल- डीजल को मात दे दी है। यह लोग एक छोटा सा जुगाड़ कर 20 से 22 रुपए सस्ता पेट्रोल-डीजल खरीद रहे हैं। खास बात यह है कि इसके लिए लोगों को कोई खास मशक्कत नहीं करनी पड़ रही है। इस जुगाड़ के जरिए आप भी सस्ता पेट्रोल-डीजल खरीद सकते हैं।

ये है जुगाड़

हम बात कर रहे हैं देश की राजधानी से 1897 किमी दूर बसे असम के बकसा जिले की। यहां के लोगों को देश में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से कोई परेशानी नहीं है। यहां के लोग दिल्ली के मुकाबले 20 से 22 रुपए सस्ता पेट्रोल-डीजल खरीद रहे हैं।

दरअसल बकसा जिला भूटान से लगता हुआ है। भूटान में पेट्रोल-डीजल की कीमत भारत की तुलना में 20 से 22 रुपए कम हैं। एेसे में बकसा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के लोग भूटान में जाकर अपनी गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल भरवा रहे हैं। यहां के लोग बिना किसी रोकटोक के भूटान के सैमड्रप जोंगखार पहुंच जाते हैं और यहां से तेल भरवाकर भारत लौट आते हैं।

नेशनल हाइवे 127 ने आसान बनाई राह

असम के बकसा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की भूटान जाने की राह को नेशनल हाइवे 127 आसान बना देता है। दरअसल भारत और भूटान के आपसी संबंध दशकों से बेहतर हैं। इसका फायदा भूटान के सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों को भी मिलता है।

असम के लोग आसानी से सस्ते पेट्रोल-डीजल खरीद लाते हैं। असम में इस समय पेट्रोल की कीमत 76 रुपए प्रति लीटर हैं जबकि भूटान में यह 52 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है। बकसा जिले को लोगों को मात्र आधा किलोमीटर की दूरी तय करने पर ही सस्ता पेट्रोल-डीजल मिल जाता है।

भारत से ही सप्लाई होता है तेल

भूटान में पेट्रोल और डीजल की अापूर्ति भारत से ही की जाती है। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि फिर वहां तेल इतना सस्ता क्यों मिलती हैं। यहां हम आपको बता दें कि जीएसटी लागू होने के बाद भारत से भूटान को जीरो रेटेड पर निर्यात होता है।

यानी भूटान से जो एक्साइड ड्यूटी ली जाती है वह उसे लौटा दी जाती है। भूटान की सरकार भी अपने देश के लोगों को फायदा पहुंचाना चाहती है। इसलिए पेट्रोल-डीजल सस्ती दरों पर बेचा जा रहा है। इसका फायदा भारत के लोगों को भी मिल रहा है। यदि आप भी असम की यात्रा पर जा रहे हैं तो सस्ते पेट्रोल-डीजल का लाभ ले सकते हैं।

अब लीजिए ‘तंदूरी चाय’ की चुस्‍की

अगर खाने-पीने के शौकीन हैं तो तंदूरी चिकन या तंदूरी रोटी का नाम जरूर सुना होगा, लेकिन पुणे स्थित एक चाय वाला अपनी खास तंदूरी चाय (tandoori chai) से लोगों को अपनी ओर अट्रैक्‍ट कर रहा है। यह चाय एक खास रेसिपी की मदद से तैयार होती है। इसके बाद इसमें गर्म कुल्‍लह का तड़का दिया जाता है। खास जायका और बनाने के खास तरीके की वजह से यह चाय आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

पुणे के खराडी इलाके में खुली इस ‘टी स्‍टॉल’ का नाम चाय ला (‘Chai-La) है। इस यूनीक चाय की दुकान को शुरू करने वाले प्रमोद बैंकर और अमोल राजदेव ग्रेजुएट और युवा आंत्रप्रेन्‍योर हैं। इसमें से अमोल B.Sc पास हैं, जबकि प्रमोद ने फार्मेसी में ग्रेजुएशन किया है।

दुनिया में यह पहला प्रयोग

दोनों का दावा है कि तंदूर के जरिए चाय बनाने का दुनिया में यह पहला प्रयोग उन्‍हीं ने किया है। गांव में दादी मां के द्वारा मिट्टी के बर्तन में दूध उबालते देख कर उन्‍हें इस खास तंदूरी चाय का आइडिया आया।

प्रमोद और अमोल दावा करते हैं कि उनकी तंदूरी चाय ग्राहकों को खास अहसास कराती है। जब इस चाय को गर्म कल्‍हड़ में खास तरीके से तड़का दिया जाता है तो इसमें मिट्टी की सोंधी खुशबू आती है। साथ ही लोगों को गांव की मिट्टी का अहसास होता है। अमोल पहले से ही खाने पीने के कारोबार से जुड़े हैं। वही पुणे में ही एक महाराष्‍ट्री खानों से जुड़ा एक रेस्‍टोरेंट चला रहे हैं।

कैसे बनती है यह चाय?

अमोल के मुताबिक, इसे बनाने का एक खास तरीका है। कुल्‍हड़ को पहले से ही गर्म तंजूर की भट्टी में गर्म किया जाता है। इसके पहले से ही थोड़ा कम पकी चाय को तपते कुल्‍हड में डाला जाता है।

चाय को गर्म कुल्‍हड़ में डालते ही बुलबुला उठता है और इसी के साथ चाय सर्व के लिए तैयार हो जाती है। गर्म कुल्‍हड़ में चाय सोंधी खुशबू भर देता है। जैसे यह प्रक्रिया पूरी होती है चाय को सामान्‍य कुल्‍हड़ में डाला जाता है और ग्राहकों के सामने बन मस्‍का या बिस्किट के साथ परोसा जाता है।

इस कूलर के सामने फेल हैं सारे AC

गर्मियों का मौसम इस समय अपने चरम पर है। पारा रोजाना 43 डिग्री को पार कर रहा है। एेसे में लोग घर में AC या कूलर लगाने को लेकर असमंजस में हैं। कई लोग बिजली बिल को देखते हुए AC लगवाने से कतरा रहे हैं तो कई लोग कम ठंडक को देखते हुए कूलर के बजाए AC को प्राथमिकता दे रहे हैं।

लेकिन आज हम आपको एक एेसे कूलर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके आगे अच्छे से अच्छा AC भी फेल है। खास बात यह है कि इस कूलर के लगाने के बाद आपके बिजली बिल पर भी कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। कहने का मतलब यह है कि इस कूलर के लगाने के बाद आपका खर्च पहले से आधा हो जाएगा, लेकिन घर में ठंडक AC के जितनी ही रहेगी।

सभी कमरों को ठंडा करेगा एक ही कूलर

आज हम आपको जिस कूलर के बारे में बताने जा रहे हैं उसे Evaporative कूलर कहा जाता है। इस कूलर की कीमत वैसे तो 39 हजार से शुरू होती है लेकिन इसके फायदे इतने हैं कि यह AC से भी सस्ता पड़ता है।

आमतौर पर 1 से 1.5 टन का AC तीस हजार रुपए का मिलता है जबकि Evaporative कूलर की शुरुआती कीमत 39 हजार रुपए है। लेकिन एक AC जहां केवल 1 कमरे को ही ठंडा कर पाता है वहीं Evaporative कूलर कई कमरों को ठंडा कर सकता है। इस तरह से आप अलग-अलग कमरे में लगने वाले कई AC की बचत कर सकते हैं।

बिजली बिल में भी होगी बचत

Evaporative कूलर की बिजली खपत AC की तुलना में काफी कम है। इस कारण इसके संचालन का खर्च कम ही पड़ता है। Evaporative कूलर को घर में लगाकर आप AC के मुकाबले बिजली के बिल में भी बचत कर सकते हैं। बाजार में इसकी विस्तृत रेंज उपलब्ध है। जानकारों के अनुसार विदेशों में इस कूलर का इस्तेमाल काफी ज्यादा है। आप Evaporative कूलर को साइड डिस्चार्ज, डाउन डिस्चार्ज, बॉटम डिस्चार्ज और विंडो स्टाइल मॉडल में खरीद सकते हैं।

इस ब्राण्ड का पानी पीते हैं कोहली

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली अपनी मेहनत और फिटनेस की वजह से आज इस मुकाम को हासिल कर पाए हैं. खुद को फिट रखने के लिए विराट कोहली काफी मेहनत करते हैं.

अपनी फिटनेस के लिए वो सुबह-शाम जिम तो जाते ही हैं साथ ही अपने खाने-पीने का बहुत ध्यान रखते हैं. विराट खाने-पीने में कोई लापरवाही नहीं करते और हमेशा संतुलित आहार लेते हैं. विराट जंक फूड खाना पसंद नहीं करते. उन्हें घर का हेल्दी खाना बहुत अच्छा लगता है.

विराट अपनी फिटनेस के लिए सिर्फ बाहर के खाने से ही नहीं, बल्कि पानी से भी परहेज करते हैं. वो अच्छी कम्पनी का पानी पीते हैं. ऐसा बताया जाता है कि वो एवियन ब्राण्ड का पानी पीते हैं. यह एक खास तरह का पानी है जो काफी महंगा है और इसे फ्रांस से मंगवाया जाता है.

इस पानी की कीमत 600 रुपए प्रति लीटर है. कोहली दुनिया में जहां भी जाते हैं, मात्र यही पानी पीते हैं. जबकि दुनिया में जहां भी इस पानी के मिलने की संभावना नहीं होती, वहां इस पानी को अपने साथ ले जाते हैं.

हम आपको बता दें कि इस तरह का पानी एक विशेष प्रकार का पानी होता है जो वजन घटाने और तनाव दूर रखने आदि में मददगार साबित होता है.यह अकेले ही नहीं है और भी ऐसे कई सेलिब्रिटी हैं जो कि एक लीटर पानी की बोतल पर लगभग 36 हजार रुपए तक का खर्च कर देते हैं.

कोहली खुद भी हेल्दी फूड खाते हैं और दूसरों को भी खाने के लिए कहते हैं. इसके अलावा दूसरों को जंक फूड से दूर रहने की सलाह देते हैं. विराट फ्राइड चिप्स की जगह वीट क्रैकर्स या इसी तरह की हेल्दी चीजें खाना पसंद करते हैं. उन्हें फ्राइड चिकन बिलकुल पसंद नहीं है. लेकिन उन्हें चॉकलेट ब्राउनी बहुत पसंद है इसे देखकर विराट अपने आपको खाने से रोक नहीं पाते.

36 रुपये का पेट्रोल बिकता है 77 रुपये में, आखिर कहां जाते हैं 41 रुपये?

सोमवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमत में 33 रुपये प्रति लीटर की दर से इजाफा किया। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 77.14 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं मुंबई में महज एक लीटर पेट्रोल के लिए लोगों को 84.40 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। पेट्रोल पर मची हाय तौबा के बीच हर कोई इन तीन सवालों के जवाब जानना चाहता हौ-

  • जो पेट्रोल उपभोक्ता को करीब 77 रुपये में मिल रहा है, उसे तेल कंपनिया सिर्फ 36 रुपये में खरीदती हैं। तो 41 रुपये किसकी जेब में गए?
  • जब अंतरर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल की कीमत घट रही है, तो फिर हमारे देश में पेट्रोल महंगा क्यों हो रहा है?
  • जिस देश को भारत तेल बेच रहा है वहां पेट्रोल सस्ता है, तो फिर खुद भारत में इसकी कीमत इतनी ज्यादा क्यों है?

कच्चा तेल महंगा होने पर भी कम थी पेट्रोल की कीमत

आमतौर पर दलील दी जाती है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल की कीमत बढ़ने की वजह से देश में पेट्रोल महंगा हो रहा है। आपके ज्ञानवर्धन के लिए बता दें कि साल 2013 में जब कच्चा तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भी जा पहुंची थी, तब पेट्रोल की कीमत अधिकतम 71.31 रुपये प्रति लीटर थी। मगर अब जब कच्चा तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से भी कम है, तो भी खुदरा बाजार में पेट्रोल 76.57 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। ऐसा कैसे हो सकता है भला?

टैक्स का खेल

भले ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता हो, मगर इसे भारत लाने के लिए तेल कंपनियों को भारी एक्साइज ड्यूटी चुकानी पड़ती है। साल 2014 से लगातार ड्यूटी बढाई जा रही है। नवंबर 2014 से जनवरी 2016 तक एक्साइस ड्यूटी में करीब 9 गुना बढ़ोतरी की गई। सिर्फ एक बार, अक्टूबर 2017 में इसमें कमी की गई। बजट 2018 में भी भले ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइस ड्यूटी 2 रुपये प्रति लीटर की दर से घटाया गया, मगर दूसरी तरफ रोड सेस आठ फीसदी बढ़ने से बात घुमा फिराकर वहीं पहुंच गई।

ऐसे तय होती है एक लीटर पेट्रोल की कीमत

23 मई, 2018 के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में तेल की कीमत इस आधार पर तय की गई है-

  • अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल की कीमत 86.28 डॉलर प्रति बैरल है। वहीं, डॉलर की मौजूदा एक्सचेंज रेट 67.45 रुपये है। इस लिहाज से एक बैरल के लिए तेल कंपनियों को 86.28x 67.45 यानी 5819.58 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
  • एक बैरल में 159 लीटर पेट्रोल होता है। इस हिसाब से एक लीटर पेट्रोल की कीमत 36.60 रुपये हुई। बीपीसीएल के मुताबिक इस तेल को रिफाइन करने के बाद कंपनियां डीलर को 37.63 प्रति लीटर की दर से पेट्रोल बेचती हैं।
  • मौजूदा नियम के अनुसार, भारत में एक लीटर पेट्रोल लाने के लिए डीलरों को 19.48 रुपये केंद्र सरकार को देना पड़ता है।
  • वहीं, यानी डीलर तक पहुंचते पहुंचते पेट्रोल की कुल कीमत कुल 57.11 (19.48+37.63) रुपये प्रति लीटर हो जाती है।

राज्य सरकारें अलग से लगाती हैं टैक्स

पेट्रल और डीजल वस्तु एवं सेवा कर के अंतर्गत नहीं आते। राज्य सरकारें इस पर वैल्यू ऐडेड टैक्स (वैट) वसूलती हैं। यही वजह है कि हर राज्य में पेट्रोल की कीमत में फर्क होता है। दिल्ली में पेट्रोल पर 27 फीसदी टैक्स लगा है। यानी प्रति लीटर 16.40 रुपये टैक्स लगता है। इसके अलवा डीलर का कमीशन 3.63 प्रति लीटर तय किया गया है।यानी पेट्रोल की कुल कीमत हुई- 57.11 +16.40 +3.63 = 77.14 रुपये प्रति लीटर

बेहद जरुरी खबर-इन 3 फलों से फैल रहा है खतरनाक निपाह वायरस, भूलकर भी न खाएं

केरल से शुरू हुए निपाह वायरस का खौफ पूरे भारत में है. दिल्ली-एनसीआर के लोगों को भी अलर्ट कर दिया गया है. इस अज्ञात इन्फेक्शन के चलते हाई अलर्ट घोषित किया गया है. केरल में हुई रहस्यमयी मौतों का कारण ‘निपाह वायरस (NiV)’ को बताया गया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने निपाह को एक उभरती बीमारी करार दे चुका है. WHO के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ की एक नस्ल में पाया जाता है. यह वायरस उनमें प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है.

चमगादड़ जिस फल को खाती है, उनके अपशिष्ट जैसी चीजों के संपर्क में आने पर यह वायरस किसी भी अन्य जीव या इंसान को प्रभावित कर सकता है. ऐसा होने पर ये जानलेवा बीमारी का रूप ले लेता है. ये वायरस तीन फलों में हो सकता है. ऐसे में इन्हें भूलकर भी न खाएं.

केरल से आने वाले फल

केरल में फैले निपाह वायरस से फिलहाल दिल्ली में कोई खतरा नहीं है. लेकिन, चिकित्सकों का कहना है कि लोगों को बचाव के उपाय जरूर कर लेने चाहिए. केरल से जो केले आ रहे हैं, उनको खाने से बचें. अगर खाना ही है तो अच्छे से धोकर खाएं. क्योंकि, उत्तर भारत में ज्यादातर केले, केरल से आते हैं. ऐसे में इन्हें खाना सेहत के लिए सही नहीं है.

धोकर खाएं खजूर और आम

खजूर और आम को भी धोकर खाएं. रमजान के महीने में खजूर सबसे ज्यादा खाए जाते हैं. दिल्ली में बड़ी मात्रा में केले और खजूर केरल से मंगाए जाते हैं. निपाह वायरस से प्रभावित केरल के कालीकट और मल्लापुरम जिले में केले और खजूर की बड़ी मात्रा है. एम्स के डॉक्टर्स की टीम यहां जांच कर रही है. ऐसे में यहां से आने वाले फलों को ध्यान से खाना चाहिए.

क्या हैं निपाह (NiV) के लक्षण

मनुष्‍यों में निपाह वायरस, encephalitis से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से ब्रेन में सूजन आ जाती है. बुखार, सिरदर्द, चक्‍कर, मानसिक भ्रम, कोमा और आखिर में मौत, इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं. 24-28 घंटे में यदि लक्षण बढ़ जाए तो इंसान को कोमा में जाना पड़ सकता है. कुछ केस में रोगी को सांस संबंधित समस्‍या का भी सामना करना पड़ सकता है.

भारतीय सेना भी चिंतित

केरल के कोजिकोडे जिले में फैले निपाह वायरस ने भारतीय सेना को भी चिंता में डाल दिया है. निपाह वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सेना के डायरेक्‍टर जनरल आफ मेडिकल सर्विसेस की तरफ से एक एडवाइजरी आर्मी के सभी छह कमांड हेडक्‍वाटर्स को भेजी गई है. सेना की एडवाइजरी में बताया गया है कि निपाह वायरस के संक्रमण से अब तक केरल के कोजिकोडे जिले में अब तक तीन मौतें हो चुकी है. हालांकि केरल सरकार ने निपाह वायरस से दस लोगों के मौत की पुष्टि की है.

सेना ने दी जवानों को सलाह

केरल सहित भारत में इस वायरस को पहली बार डि‍टेक्‍ट किया गया है. सेना ने अपने सभी सैनिकों और अधिकारियों को सलाह दी है कि इस संक्रमण से बचने के लिए चमगादड़ और सुअर से दूरी बनाकर रखें. सेना ने खास तौर पर अपने सैनिकों को ताकीत किया है कि संक्रमित इलाकों में पेड़ो से जमीन पर गिरे फलों का सेवन बिल्‍कुल भी न करें. इन फलों के खाने से वे संक्रमण का शिकार हो सकते हैं.

आम आदमी क्यों सहे पेट्रोल-डीजल का सारा बोझ, जब सरकार के पास है रास्ता

पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। राजधानी दिल्‍ली में मंगलवार को पेट्रोल 76.87 रुपए और डीजल 68.08 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था। ऊंची कीमतों के चलते सरकार पर लगातार इस बात का दबाव है कि वह कीमतों में कटौती करे। हाल में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान से संकेत मिला है कि वह एक्‍साइज ड्यूटी घटाकर थोड़ी राहत दे सकती है।

अक्‍टूबर 2017 में सरकार ऐसा कर भी चुकी है। 2014 में क्रूड की कीमतें नीचे जाने के बाद मोदी सरकार ने 1 दर्जन से ज्‍यादा बार पेट्रोल-डीजल पर एक्‍साइज ड्यूटी बढ़ाई थी। अब कीमतें ऊपर जाने के बाद वह खामोश है। एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि कीमतों का सारा बोझ उपभोक्‍ताओं पर डालना सही नहीं है।

एक्‍साइज ड्यूटी कम करने का यही समय है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि ऐसे समय में जब सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की जीतोड़ कोशिश कर रही है तो एक्‍साइज ड्यूटी कम करने की गुंजाइश कहां तक है। एक विकल्‍प यह हो सकता है कि सरकार बैठकर क्रूड की कीमतें कम होने का इंतजार करे। पर क्‍या अंतराष्‍ट्रीय हालात ऐसे हैं कि इंतजार किया जा सकता है।

ऐसा पहली बार भी नहीं हुआ जब सरकार के सामने इस तरह का संकट आया है, उसके पास आखिर लॉन्‍च टर्म का प्‍लान क्‍या होना चाहिए। पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट की बड़ी कीमतों ने आम लोगों के मन में कई सवाल पैदा कर दिए हैं। मनीभास्‍कर की खास खबर में पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और इससे अन्‍य पहलुओं की पड़ताल करते हैं।

3 महीने में कहां पहुंची कीमत ?

रिटेल प्राइस

अगर बीते 3 महीनों की बात करें तो पेट्रोल की खुदरा कीमतों में करीब 5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक, 1 मार्च को राजधानी दिल्‍ली में पेट्रोल की कीमतें 71.57 रुपए प्रति लीटर पर थीं, ये अब बढ़कर 76.87 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच चुकी हैं। 1 मार्च को डीजल की कीमतें 62.25 रुपए प्रति लीटर पर थीं, जो अब बढ़कर 67.82 रुपए प्रति लीटर के लेवल पर आ गई हैं।

इंटरनेशनल प्राइस

क्रूड की कीमतों में भी लगातार तेजी देखी गई है। मार्च की शुरुआत में कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। तेजी से बदले अंतरराष्‍ट्रीय हालात, कोरिया संकट, ट्रेड वॉर, ईरान संकट के चलते बढ़ी डिमांग, ओपेक और गैर ओपेक देशों की ओर से एक साथ प्रोडक्‍शन कट के चलते कीमतें लगातार बढ़ती गई। यह मई के दूसरे हफ्ते में 80 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया, इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा।

कंपनियां क्यों तेजी से बढ़ा रही हैं दाम ?

असल में तेल कंपनियों ने कर्नाटक चुनाव के लिए मतदान होने से पहले करीब तीन हफ्ते से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा था। 12 मई को कर्नाटक में मतदान हुआ। उसके बाद 14 मई को तेल कंपनियों ने फिर से कीमतों की रोज समीक्षा शुरू कर दी।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 19 दिन तक बदलाव नहीं करने से तेल कंपनियों को करीब 500 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है। क्‍योंकि, अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से उनकी लागत में इजाफा हुआ। ऐसे में कर्नाटक चुनाव के पहले वाले मार्जिन पर जाने के लिए तेल कंपनियां तेजी से दाम बढ़ा सकती हैं।

कैसे 39 का पेट्रोल हो जाता है 76 रुपए लीटर

पेट्रोल-डीजल की बात करें तो उस पर लगने वाला टैक्स उसकी वास्तविक कीमत से ज्यादा होता है। मसलन अगर 78-79 डॉलर प्रति बैरल क्रूड का प्राइस है और डॉलर के मुकाबले रुपया 68 की रेंज में है तो 1 लीटर पेट्रोल की कीमत दिल्ली में करीब 39-40 रुपए होगी।

इसमें डीलर कमीशन भी शामिल है। वहीं, इस पर 27 फीसदी वैट यानी 11 रुपए रु का टैक्स इसके अलावा 23.40 रुपए के आस-पास एक्साइज ड्यूटी लगेगी। यानी कुल टैक्स का 60 फीसदी एक्साइज ड्यूटी होगी। इस तरह से 39 रुपए का पेट्रोल करीब 76 रुपए का हो जाएगा। इसी तरह से डीजल के मामले में भी आम आदमी को वास्तविक के बराबर ही टैक्स देना होता है जो सरकार के खजाने में जाता है।

कितना बढ़ा टैक्‍स ?

अगर सितंबर 2014 के बाद से बात करें तो अब तक सिर्फ डीजल पर 17.33 रुपए प्रति लीटर अतिरिक्‍त टैक्‍स बढ़ाया जा चुका है। इसमें पिछले साल अक्‍टूबर में मात्र 2 रुपए की कमी की गई है। टैक्‍स में यह कमी पेट्रोल में भी की गई थी।

माना जा रहा है कि मात्र 2 रुपए की इस कमी से सरकारी खजाने को 26,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। अब भी जितनी कीमत पर पेट्रोल बिक रहा है, उसमें आधे से ज्‍यादा हिस्‍सा टैक्‍स का ही है, जो सरकार वसूलती है। अगर दिल्‍ली की बात करे कि बिना टैक्‍स के 19 अप्रैल को पेट्रोल की कीमतें मात्र 35.20 रुपए पड़ रही हैं, जबकि यह 74.10 रुपए के आसपास बिक रहा था।

कीमतों में कमी करने के विकल्‍प

लॉन्‍ग टर्म

सरकार एनर्जी के सस्‍ते, लंबे और टिकाऊ श्रोतों जैसे सोलर, विंड और न्‍यूक्लियर एनर्जी के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हो। इससे एक ओर जहां पेट्रोलियम की डिमांड कम होगी, वहीं दूसरी ओर इम्‍पोर्ट पर निर्भरता कम होगी।

मिड टर्म

बॉयोफ्यूल (एथेनॉल) का ज्‍यादा से ज्‍यादा यूज। भारत में अब भी 2 फीसदी के आसपास एथेनॉल पेट्रोल-डीजल में मिलाया जा रहा है। जबकि सरकारी मंजूरी 10 फीसदी है। अमेरिका जैसे देश में करीब 20 फीसदी तक एथेनॉल मिलाया जाता है। हालांकि भारत में इससे जुड़ी इंडस्‍ट्री नहीं होने के कारण इस दिशा में खास प्रगति नहीं हो पाई है।

शार्ट टर्म

सरकार एक्‍साइज ड्यूटी में कमी करे। राज्‍य सरकारें वैट घटाएं या फिर ऑयल कंपनियां घाटा सहें। या फिर सरकार सब्सिडी के पुराने फार्मूले को फिर से लागू करे। मौजूदा समय में सबसे ज्‍यादा इसी की उम्‍मीद की जा रही है।

क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट

उपभोक्‍ता पर नहीं डाल सकते पूरा बोझ

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के चीएफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी ने बताया कि ऐसे समय में जब तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं तो सरकार इसका पूरा बोझ उपभोक्‍ताओं पर नहीं डाल सकती है। सरकार को डीजल पेट्रोल पर एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती करनी चाहिए।

जब अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें गिर रहीं थी तब सरकार ने एक्‍साइज ड्यूटी बढ़ाई थी। अब जब कीमतें बढ़ रही है तो सरकार को एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती करके उपभोक्‍ताओं को राहत देनी चाहिए। हालांकि सरकार के सामने इससे वित्‍तीय मोर्च पर चुनौतियां खड़ी होंगी।

इससे सरकार के लिए वित्‍तीय घाटे को नियंत्रित करना मुश्किल होगा। अब यह सरकार पर है कि वह इसे कैसे मैनेज करती है। सरकार को उपभोक्‍ताओं को राहत देने के लिए कहीं न कहीं तो सैक्रीफाइस करना ही होगा।

इन वजहों से बढ़ रही कीमतें

ईरान संकट

अमेरिका ने ईरान के साथ 2015 में की गई परमाणु डील तोड़ ली है। इसके चलते सप्‍लाई में अवरोध का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते क्रूड की कीमतें ऊपर जा रही हैं। इसका असर भारत में दिख रहा है।

अमेरिका का रुख

चीन के साथ ट्रेड वॉर, सीरिया में जारी तनाव, रूस के साथ अनबन जैसे अमेरिका के कई कदमों के चलते अंतराष्‍ट्रीय स्‍तर पर जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने का खतरा हो गया है। सप्‍लाई बाधित होने की आशंका लगातार क्रूड की कीमतों को बढ़ा रही है। यहां तक की ईरान के साथ परमाणु डील तोड़ने का कसूरवार भी कहीं न कहीं पश्चिमी देश अमेरिका को ही मान रहे हैं। एनर्जी एक्‍सपर्ट नरेंद्र तनेजा भी मौजूदा कीमतों में बढ़ोतरी का कूसरवार अमेरिका को ही मान रहे हैं।

ओपोक और रूस का प्रोडक्‍शन कट

कीमतें 50 डॉलर से नीचे जानें के बाद से ही ओपेके और अन्‍य देश कीमतों को ऊपर ले जाने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि के दिनों में इसमें सहमति बन गई है। इसके चलते जहां एक तरफ जहां क्रूड के प्रोडक्‍शन में कमी आ रही है तो वहीं दूसरी ओर जियो पॉलिटिकल टेंशन डिमांड में कमी नहीं होने दे रहा है। कमजोर प्रोडक्‍शन और मजबूत डिमांड कीमतों को नीचे नहीं आने दे रहे हैं।

भविष्‍य के क्‍या हैं संकेत ?

क्रूड

  • 85 डॉलर का बैरियर पार कर सकता है क्रूड

एक्‍सपर्ट का मानना है कि क्रूड की कीमतें मौजूदा के 80 डॉलर प्रति डॉलर के लेवल से आगे बढ़कर 85 डॉलर का बैरियर तोड़ सकता है। केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, आने वाले दिनों में क्रूड 85 से 86 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।

ग्लोबल एजेंसी मॉर्गन स्टैनली के अनुसार क्रूड का कंसर्न अभी 2 साल और बना रहेगा और 2020 में यह 90 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर सकता है। मतलब साफ है, पेट्रोलियम को लेकर मोदी सरकार पर दबाव आगे भी बना रहेगा।

पेट्रोल-डीजल

  • 90 रुपए प्रति लीटर पार हो सकता है पेट्रोल

अजय केडिया का कहना है कि क्रूड मौजूदा लेवल से आगे कम से कम 7 से 8 फीसदी महंगा हो सकता है। वहीं, कंसर्न बढ़ा तो 10 फीसदी महंगा हो सकता है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के भाव 6 रुपए से 8 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं।

अगर पेट्रोल में 6 से 8 रुपए की बढ़ोत्तरी होती है तो मुंबई में इसकी कीमतें 90 रुपए प्रति लीटर के पार जा सकती हैं। मुंबई में अभी पेट्रोल 84.70 रुपए प्रति लीटर है। वहीं, दिल्ली में पेट्रोल 80 रुपए प्रति लीटर पार कर जाएगा। दिल्ली में अभी पेट्रोल की कीमत 76.87 रुपए प्रति लीटर है।

कीमतें बढ़ने का असर

  • आम लोगों की जेब होगी ढ़ीली

दरअसल पेट्रोल की कीमतों से आम लोगों की जेब सीधी ढ़ीली होती है। मौजूदा समय में करीब 80 फीसदी यात्री वाहन पेट्रोल से चलते हैं। ऐसे में रोजाना आधार पर इसका उसर उनकी जेब पर पड़ना तय होता है।

ज्‍यादातर चीजों के कीमतें बढ़ सकती हैं

डीजल की कीमतें सीधा जरूरी चीजों को महंगा कर सकती है। देश में करीब 80 फीसदी माल ढुलाई अब भी ट्रकों के जरिए होती है। ट्रकों में ईंधन का एक मात्र विकल्‍प डीजल है। बीते 4 महीनों की बात करें तो अब तक यह करीब 10 रुपए प्रति लीटर महंगा हो चुका है। कीमतें नहीं कम हुई तो ट्रांसपोर्ट कॉस्‍ट बढ़ेगी और इसका सीधा असर वस्‍तुओं की कीमतों पर पड़ना तय है।

इस दिन से बेकार हो जाएगा आपका आधार कार्ड

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण(UIDAI) ने आधार को लेकर एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में हैं। यूआईडएआई के इस फैसले के बाद अब आपको आधार कार्ड जेब में लेकर चलने की कोर्इ जरूरत नहीं होगी। क्योंकि अब आपका आधार वर्चुअल पहचान के तौर पर भी उपलब्ध होगा।

कैशलेस अर्थव्यवस्था के बाद अब सरकार वर्चुअल आईडी के इस्तेमाल जोर देने वाल देने जा रही है। सरकार ये कदम आधार की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए ले रही है। सरकार वर्चुअल आधार की सुविधा को 1 जून 2018 से लाने जा रही।

इसके बाद आपकी जेब में पड़ा आधार कार्ड एक तरह से बेकार हो जाएगा यानि आपका काम वर्चुअल आईडी से ही जाएगा। हालांकि आपका आधार पहले की तरह ही वैलिड रहेगा। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर क्या होता है वर्चुअल आधार और इसके क्या फायदे होंगे। साथ में आगे हम आपको ये भी बताएंगे की कैसे आप अपने आधार को जेनरेट कर सकते है?

क्या होता है वर्चुअल आधार ?

वर्चुअन आधार आपके मौजूदा आधार का डिजिटल फाॅर्म होगा। यह 16 अंकों का एक नंबर होता है। यूआईडीएआई आपको अपने आधार का एक वर्चुअल आईडी तैयार करने का मौका देगी।

यदि आपको कहीं अपना आधार डिटेल देने की आवश्यकता होती है तो आप अपने आधार नंबर की जगह 16 अंकों का वर्चुअल आधार आईडी दे सकते हैं। इसे जनरेट करने की सुविधा आपको 1 जून से मिलेगी।

ऐसे जेनरेट कर सकते हैं अपना वर्चुअल आधार आईडी

इसे आप यूआईडीएआई के पोर्टल से जेनरेट कर सकते हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार यदि आप अपना वर्चुअल आधार का जेनरेट करते हैं तो ये एक दिन के लिए ही वैलिड होता है। अगले दिन प्रयोग करने के लिए इसे आपको फिर से जेनरेट करना होगा।

आपको बता दें कि ये सिर्फ यूआईडीएआई के पोर्टल से ही जेनरेट किया जा सकता है। आपको यूआईडीएआई के पोर्टल पर जाकर अपना आधा नंबर डालना होगा जिसके बाद आपके फोन पर एक वन टाइम पासवड यानि की ओटीपी आएगा।

इस ओटीपी को रिक्त स्थान पर भरने के बाद आपको अपना वर्चुअल आधार जेनरेट करने को विकल्प मिलेगा। इसके जेनरेट होने के बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर 16 अंकों का एक कोड मिलेगा। ये कोड ही आपका वर्चुअल आधार आईडी होगी।

वर्चुअल आधार आईडी के क्या होंगे फायदे

यदि कहीं आपको अपने आधार नंबर के सत्यापन की आवश्यकता होती है तो आप इसे 16 अंकों के कोड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस नए आईडी से आपका नाम, पता और फोटोग्राफ जैसी कई चीजों का सत्यापन भी हो जाएगा। यदि आप एक से अधिक बार अपना वर्चुअल आईडी जेनरेट करते हैं तो पुरानी आईडी अपने आप ही कैंसिल हो जाएगी।

भूखों को हर रोज़ खाना खिलाता है ये शख्‍स, कहता है- ‘भूख का कोई मजहब नहीं होता’

फ्लाईओवर के नीचे थालियां लेकर चटाई पर बैठे बेघरों, भिखारियों, कचरा बीनने वालों और मजदूरों को रोज दोपहर किसी के आने का इंतजार रहता है. जैसे ही 12:30 बजता है एक दुबला-पतला आदमी वहां आता है और सबकी थाली में गरम-गरम चावल और दाल परोसना शुरू कर देता है.

हैदराबाद के दबीरपुरा फ्लाईओरवर के पास रोज यह नजारा 2012 से देखा जा रहा है. ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरता है जब शहर के इस फ्लाईओवर के नीचे खड़ी इस भीड़ को दोपहर का खाना नहीं मिलता हो और यह आदमी उन्हें भोजन नहीं परोसता हो.

यह आदमी कोई और नहीं बल्कि सैयद उस्मान अजहर मकसुसी हैं जिन्होंने पिछले छह साल से भूखों और जरूरतमंदों की भूख मिटाना अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया है. इनका एक नारा है कि भूखों का कोई मजहब नहीं होता है.

चार साल की उम्र में ही सिर से पिता का साया उठ जाने के पाद खुद भूखे रहने की पीड़ा झेल चुके अजहर भूखों का दर्द समझते हैं. इसलिए वह उनके कष्टों को दूर करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं.

इसी फ्लाईओवर के नीचे छह साल पहले एक दिन उन्हें एक बेघर औरत मिली जिनसे भूखों को खाना खिलाने का काम शुरू करने की प्रेरणा मिली.

36 साल के अजहर ने उस वाकये को याद करते हुए कहा, ‘लक्ष्मी भूख से छटपटा रही थी. वह बिलख-बिलख कर रो रही थी. मैंने उसे खाना खिलाया और तभी फैसला किया कि मेरे पास जो सीमित संसाधन है उससे मैं भूखों की भूख मिटाऊंगा.’

शुरुआत में उनकी पत्नी घर में ही खाना पकाती थीं और वह फ्लाईओवर के पास खाना लाकर भूखे लोगों को परोसते थे. बाद में उन्होंने वहीं खाना तैयार करना शुरू कर दिया. इससे किराये की बचत हुई.

अजहर ने कहा, ‘शुरुआत में 30-35 लोग यहां होते थे मगर आज 150 से ज्यादा हैं, जिन्हें मैं रोज खाना खिलाता हूं. अजहर की एक संस्था है जो अब इस काम का संचालन करती है. संस्था का नाम है ‘सनी वेल्फेयर फाउंडेशन’. संस्था ने आज खाना पकाने के लिए दो रसोइयों को रखा है.’

तीन साल पहले उन्होंने यहां के अलावा सिकंदराबाद स्थित गांधी अस्पताल में भी भूखों को खाना खिलाने का काम शुरू कर दिया. फाउंडेशन की वैन में रोज 150-200 लोगों का खाना यहां से जाता है. फाउंडेशन कुछ एनजीओ के साथ मिलकर बेंगलुरु, गुवाहाटी, रायचूर और तांदुर शहर में रोजाना आहार कार्यक्रम का संचालन करता है.

अजहर को खुशी है कि जो काम उन्होंने अकेले शुरू किया था आज उसके साथ कारवां सज गया है और अनेक लोग व संगठन उनके काम से प्रेरित हुए हैं. अजहर को इससे अपनी कामयाबी का अहसास होता है. हालांकि उनका मानना है कि सपना तभी साकार होगा जब इस देश से और दुनिया से भूख मिट जाएगी. भूख नाम की कोई चीज नहीं होनी चाहिए.

दबीरपुरा फ्लाईओवर के पास उनकी प्लास्टर ऑफ पेरिस की दुकान है जहां वह हर दिन सुबह और शाम कुछ घंटे बिताते हैं. उन्होंने कहा, ‘बाकी समय मैं दोनों जगहों पर भोजन की व्यवस्था में लगा रहता हूं. अजहर को इस काम में उनके भाई और परिवार के अन्य सदस्यों के अलावा कुछ कार्यकर्ता वीकऐंड में उनका हाथ बंटाते हैं.

अजहर अपनी दुकान में बैठे थे तभी एक दानदाता तीन बोरी चावल लेकर एक दोपहिया वाहन से उतरे. अजहर ने खुद वाहन से बोरियां उतारीं.

पिछले महीने उनको बॉलीवुड अभिनेता सलमान ने अपने कार्यक्रम ‘बीइंग ह्यूमन’ में हिस्सा लेने के लिए मुंबई बुलाया था. उनका चयन देशभर के छह ऐसे लोगों में किया गया था, जो वास्तविक जीवन में नायक हैं. अजहर ने सलमान के साथ बातचीत की और उनके साथ फोटो भी खिंचवाई.

इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता अजहर ‘आज की रात है जिंदगी’ में शामिल हुए थे जिसकी मेजबानी मेगास्टार अमिताभ बच्चन कर रहे थे. विभिन्न संगठनों ने भी उनको सम्मानित किया है. हालांकि अजहर आज भी जमीन से जुड़े हैं और कहते हैं, ‘मुझे कोई दफ्तर या कर्मचारी की जरूरत नहीं है. मेरे लाइफस्‍टइाल में कोई बदलाव नहीं आया है.’

अजहर किसी से पैसे नहीं मांगते हैं. उन्होंने कहा, ‘जो लोग चावल और दाल लेकर आते हैं उनका दान मैं स्वीकार कर लेता हूं. मैं किसी से नकद में पैसे नहीं लेता बशर्ते कि दानदाता चावल या दाल देने की स्थिति में न हो.’

अजहर के पिता ऑटो चलाते थे. उन्होंने कहा, ‘जब मैं महज चार साल का था तभी मेरे पिता चल बसे. चार भाई-बहनों में मैं तीसरे नंबर पर हूं.’

उन्होंने पांचवी कक्षा में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी और मजदूरी करने लगे थे.

अजहर ने कहा, ‘हम अपने दादा के घर रहते थे. उनको बड़े परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती थी. हमें दिन में एक बार खाना मिलता था. कभी-कभी वह भी नहीं मिलता था. लेकिन परिस्थितियां जो भी हों हमें अल्लाह का शुक्रगुजार बने रहना चाहिए.’

अजहर को सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां से मिली. वह मानते हैं कि अल्लाह ही गरीबों के लिए उनके मार्फत भोजन की व्यवस्था करता है.

टिप्पणियां अजहर ने कहा, ‘मैं यह नहीं देखता कि कौन खाने को आ रहा है. मैं बस यही जानता हूं कि सभी भूखे हैं. यही उनका ठिकाना है. दाने दाने पे लिखा है खाने वाले का नाम.’

कार के अंदर लॉक हो गया है कोई तो इस ट्रिक से एक मिनट में अनलॉक करें दरवाजे

अभी हाल ही में देश से एक ऐसी घटना सामने आयी थी जिसने कार चलाने वाले सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया था। बता दें कि एक शख्स के दो मासूम बच्चे कार के अंदर अनलॉक हो गए थे बाद में दम घुटने से इनकी मौत हो गयी थी।

कोई भी बाहर से इन दरवाजों को नहीं खोल पाया था क्योंकि ये लॉक थे। आज हम आपको ऐसी किसी दुर्घटना से बचने का उपाय बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप बिना कांच तोड़े बस एक मिनट में कार का दरवाजा खोल सकते हैं।

ऐसा आपके साथ कई बार हुआ होगा जब आप अपनी कार की चाभी कार के अंदर ही भूल जाते हैं और तब तक दरवाजा लॉक हो जाता है। ऐसी किसी भी अवांछनीय स्थिति से निपटने के लिए आज हम आपको एक कमल की तरकीब के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप अपनी कार को सिर्फ एक मिनट में अनलॉक कर सकते हैं।

ऐसे अनलॉक करें कार के डोर

इसके लिए आपको पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। आपको करना बस ये है कि अगर आपकी कार का दरवाजा लॉक हो जाता है तो सबसे पहले घर में पड़ी हुई एक बड़ी स्टील वाली स्केल ले आइये अब आपको इसे थोड़ा सा मोड़ना है जिससे ये थोड़ी से कर्व शेप की हो जाए। इसके बाद आपको कुछ नहीं करना है बस अपनी कार के दरवाजे शीशे की तरफ से इस स्केल को कार के लॉक तक नीचे धकेलना है।

यह काम आपको बस एक मिनट तक करना होगा और बस जैसे ही ये स्केल कार के लॉक से टच होगी आपकी कार का लॉक खुल जाएगा फिर आप कार के अंदर फंसे हुए अपने करीबी या किसी रिश्तेदार को बाहर निकाल सकते हैं। यह तकनीक इतनी कारगर है कि इसे करने में एक मिनट से भी कम का समय लगता है लेकिन इस तरकीब से आप किसी की जान भी बचा सकते हैं।