लौंग का ये छोटा-सा उपाय चमका सकता है आपकी किस्मत, बन सकते हैं कुछ ही समय में अमीर

हर कोई टाटा-बिरला जैसा अमीर बनना चाहता है, लेकिन सबका ये सपना पूरा नहीं हो पाता है। इसकी वजह मेहनत में कमी नहीं बल्कि ग्रहदशा का ठीक न होना हो सकता है। अपनी किस्मत को चमकाने और अपने सपने को हकीकत में बदलने के लिए लौंग का टोटका कारगर साबित हो सकता है।

1.आर्थिक संकट से बचने के लिए के लिए मंगलवार के दिन हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने सरसों के तेल का दीया जलाएं। उसमें दो लौंग डालें। अब हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे रुपयों की तंगी दूर होगी और धन की वृद्धि होगी।

2.अगर आपको किसी से अपना काम निकलवाना हो तो उसे अपने वश में करने के लिए शनिवार की रात को लौंग का टोटका अपनाएं। इसके लिए सात लौंग अपनी हथेली में रखें। अब मुट्ठी बंद कर लें। अब जिस व्यक्ति को अपने फेवर में करना हो उसका 31 बार नाम बोलें और हर बार नाम के साथ अपनी मुट्ठी पर फूंक मारें। अब अगले दिन यानि रविवार को इसे जला दें। इससे आपका काम बन जाएगा।

3.अगर आपका बच्चा पढ़ाई में कमजोर है तो इसे ठीक करने के लिए बुधवार के दिन 11 साबुत लौंग लें। इन्हें लाल कपड़े में बांधकर पूजा स्थान में रखें और ओम गं गणपतयै नमः की एक माला जाप करें। अब रोजाना बच्चे को ये एक लौंग खिला दें। ऐसा लगातार ग्यारह दिनों तक करने से बच्चे की मेमोरी तेज हो जाएगी।

4.अगर आपके ज्यादातर काम अटक जाते हैं तो प्रत्येक शनिवर के दिन तेल में तीन-चार लौंग डालकर दीपक जलाएं। ये दीया घर के सबसे अंधेरे कोने में जलाएं। इससे नकारात्मकता दूर होगी।

5.अगर आपकी नौकरी नहीं लग रही है या किसी खास काम में दिक्कतें आ रही हैं तो आप लौंग का उपाय करें। इसके लिए एक पीला नींबू लेकर उसके चारों ओर चार लौंग गाड़ दें। अब 21 बार ओम हनुमतै नमः का जाप करें। इससे आपका काम बन जाएगा।

6.अगर आप मानसिक रूप से परेशान रहते हैं तो इससे छुटकारा पाने के लिए रोजाना दो या तीन लौंग जलाकर इसकी राख चाट लें। इससे मन को शांति मिलेगी।

7.अगर आप किसी महत्वपूर्ण काम के लिए जा रहे हैं तो अपने घर के मेन गेट पर दो लौंग रख लें। अब इस पर पैर रखकर जाएं। इससे काम में आने वाली रुकावटें दूर हो जाएगी।

9.अगर आप अपने दुश्मन को मात देना चाहते हैं तो सात लौंग लेकर हनुमान जी के मंत्र से उसे सिद्ध कर लें। अब आप उस व्यक्ति को खाने में मिलाकर वो लौंग खिला दें। इससे व्यक्ति आपके वश में हो जाएगा।

10.धन की वृद्धि के लिए पांच लौंग को लाल कपड़े में बांधकर कौड़ियों के साथ तिजोरी में रख दें। इससे धन की बढ़ोत्तरी होगी।

जाने आखिर भारत में सूर्योदय से पहले ही क्यों दी जाती है फांसी

कानून लोगों को उनके जुर्म के अनुसार सज़ा सुनाता है. हमारे देश में मौत की सज़ा सबसे बड़ी सज़ा मानी जाती है. आपने देखा होगा कि फांसी की सज़ा होते वक़्त वहां गिनती के लोग ही मौजूद होते हैं. उन लोगों में एक तो फांसी देने वाला ज़ल्लाद होता है, कैदी की स्वास्थ्य जांच करने वाला एक डॉक्टर होता है, एक न्यायाधीश या उनके द्वारा भेजा गया कोई प्रतिनिधि और पुलिस के कुछ अधिकारी होते हैं.

नियम ये भी है कि फांसी खुले आम नहीं देनी है, ये कुछ बंद दीवारों के बीच ही होती है, सबसे आश्चर्य की बात तो ये है कि आख़िर गुनहगारों को फांसी सूर्योदय के पहले ही क्यों सुनाई जाती है? जी नहीं! ये महज़ एक इत्तिफ़ाक नहीं है, ये अनुदेशित है कि फांसी की सज़ा सुबह ही होनी चाहिए. आइये आपको बताते हैं आखिर क्यों फांसी सूर्योदय के पहले ही दी जाती है?

प्रशासनिक कारण:

जेल प्रशासन के लिए फांसी एक बड़ा काम होता है. इसलिए इसको सुबह ही निपटा दिया जाता है, ताकी फिर इसकी वजह से दिन के दूसरे काम प्रभावित ना हों. फांसी के पहले और बाद में कई तरह की प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं,

जैसे मेडिकल टेस्ट, कई रजिस्टरों में एंट्री और कई जगह नोट्स देने होते हैं. इसके बाद लाश को उसके परिवार वालों को भी सुपुर्द करना होता है. ये भी एक कारण है फांसी सुबह दिए जाने का.

नैतिक कारण:

ऐसा माना जाता है कि फांसी की सज़ा जिसको सुनाई गयी हो, उसको पूरा दिन इंतज़ार नहीं कराना चाहिए, इससे उसके दिमाग पर गहरा असर पड़ता है. इसका एक कारण ये भी है कि उसके परिवार वालों को इतना समय दे दिया जाए कि वो आराम से उसका अंतिम संस्कार कर दें.

सामाजिक कारण

किसी आदमी को फांसी देना समाज के लिए एक बड़ी ख़बर होती है. इसका समाज में गलत प्रभाव न हो और समाज में किसी भी प्रकार की अनिष्ट होने की सम्भावना को दबाने के लिए सुबह ही फांसी दे दी जाती है.

मीडिया और जनता इस वक़्त उतनी सक्रिय नहीं होती और ये समय काफी शांत होता है, जिससे कैदी मानसिक तौर पर भी कुछ हद तक तनावमुक्त रहता है.

मुकेश अंबानी की 1 घंटे की कमाई जान दांतों तले दबा लेंगे उंगली, सुबह से लेकर शाम तक इन कामों में रहते हैं व्यस्त

रिलायंस इंडस्ट्रीजके एमडी और चेयरमैन मुकेश अंबानी ( Mukesh Ambani ) का आज जन्मदिन है। फार्ब्स ( Forbes ) मैगजीन के मुताबिक मुकेश अंबानी के पास कुल 55 अरब डॉलर (करीब 3.7 लाख करोड़ रुपए) से भी अधिक की संपत्ति है।

अगर 12 महीनों के हिसाब से देखें तो मकेश अंबनी एक साल में करीब 32 हजार करोड़ रुपए और हर घंटे 1.38 करोड़ रुपए की कमाई करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि एक दिन में इतनी कमाई करने वाला शख्स क्या करता है? आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं।

सुबह 05:-5:30 बजे : मुकेश अंबानी हर रोज सुबह 5:30 बजे तक उठ जाते हैं।

सुबह 6-7:30 बजे : उठने के बाद भगवान को थोड़ी देर याद करते हैं और जिम में जाते हैं जो कि उनके आलीशान घर एंटिलिया के दूसरी मंजिल पर है। यहां वो कुछ देर स्विमिंग पूल में भी रहते हैं और इस दौरान न्यूज पेपर्स भी पढ़ते हैं।

सुबह 8-9 बजे : इसके दौरान मुकेश अंबानी 19वीं मंजिल पर ब्रेकफास्ट करते हैं। उन्हें हल्का ब्रेकफास्ट करना पसंद है। साथ में कोइ जूस जरूर पीते हैं। उन्हें पपीते का जूस खासतौर पर पसंद है। मुकेश अंबानी हर रविवार सुबह मुंबई के एक रेस्टोरेंट में ब्रेकफॉस्ट करने जाते हैं जहां साउथ इंडियन फूड खाते हैं।

सुबह 09-10 बजे : ब्रेकफास्ट के बाद मुकेश अंबानी 14वीं मंजिल पर ऑफिस जाने के लिए तैयार होते हैं। एंटीलिया के 21वीं मंजिल पर अपने घर वाले ऑफिस से लैपटॉप और काम से जुड़े फाइल लेकर निकलते हैं।

सुबह 10:30 बजे : ऑफिस के लिए निकलने से पहले मुकेश अंबानी हर रोज अपने मां का पैर छूते हैं। नीता अंबानी और अपने बच्चों से मिलते हैं।

सुबह 11:00 बजे : मुंबई के नरीमन प्वाइंट स्थित अपने ऑफिस पहुंचते हैं।

सुबह 11:30 बजे : दिनभर के काम की प्लानिंग और चेकलिस्ट के बारे में देखते हैं।

सुबह 11:30 बजे से लेकर रात 10 बजे तक : दिनभर ऑफिस का काम निपटाते हैं। उनकी खास बात है कि उनके साथ काम करने वाले हर एक कर्मचारी को नाम से जानते हैं। रात 10 बजे वो वापस घर आते हैं।

रात 11: बजे से लेकर 12 बजे तक : अपने परिवार के साथ बैठकर डिनर करते हैं। आमतौर पर इस दौरान वो रोटी, चावल, दाल और सलाद खाना पसंद करते हैं। गुजराती खाना भी उन्हें बेहद पसंद है।

रात 12 बजे : इसके बाद वो अपना कुछ जरूरी काम निपटाते हैं और नीता अंबानी से दिनभर के अपने काम को लेकर अनुभव शेयर करते हैं। मुकेश अंबानी को बॉलीवुड फिल्में देखने का भी बहुत शौक है।

5 लोगों ने 200 एकड़ के कचरे के पहाड़ को बना डाला हरा-भरा, 13 साल में लगा दिए 21 हजार पौधे

महाराष्ट्र में पुणे के बाणेर परिसर में तुकाई टेकड़ी की पहाड़ी है। करीब 13 साल पहले यहां सिर्फ गंदगी और कचरे के पहाड़ थे। लेकिन अब 200 एकड़ में फैला यह परिसर हरियाली से लहलहा रहा है। वजह- स्थानीय लोगों ने ‘वसुंधरा अभियान’ शुरू कर इलाके को साफ किया। फिर 13 साल में 21 हजार पेड़-पौधे लगा डाले।

अभियान के तहत 2006 में 15 लोगों ने पहाड़ी को साफ करने का जिम्मा उठाया था। इसके बाद धीरे-धीरे लोग उनसे जुड़ते गए। अब तक इस समूह से करीब 5 हजार लोग जुड़ चुके हैं। खास बात यह कि इस ग्रुप का कोई लीडर नहीं है।

यहां सभी अपनी मर्जी के मुताबिक काम करते हैं। अब पहाड़ी और पेड़-पौधों की देखभाल करने के लोग हर दिन यहां पहुंचते हैं। टेकड़ी पर बरसात का पानी रुके, इसके लिए पहाड़ी को समतल किया गया। इसके बाद यहां पौधे लगाना शुरू कर दिया।

यह सिलसिला अभी भी जारी है। पूरा परिसर हरा-भरा बना रहे, इसलिए लोग सुबह-शाम श्रमदान कर उनकी देखभाल करते हैं। गंदगी दोबारा न फैले इस पर भी विशेष ध्यान देते हैं। पूरा परिसर हरा-भरा बना रहे, इसलिए यहां कम पानी में हरी रहने वाली घास भी लगाई गई है।

सिंचाई के लिए बनाई पानी की 25 टंकियां

ऊबड़-खाबड़ चट्‌टानों वाले इस इलाके में पानी की कमी है। यहां बरसात का पानी भी नहीं रुकता। इसलिए पहाड़ी पर पानी की 25 टंकियां बनाई गई हैं। जिनसे पेड़-पौधों को पानी दिया जाता है। पूरा परिसर हरा-भरा बना रहे, इसलिए यहां कम पानी में हरी रहने वाली घास भी लगाई गई है।

जन्मदिन और अपनों की याद में रोप रहे पौधे

टेकड़ी पर ज्यादा से ज्यादा पौधों को रोपा जाए, इसके लिए वसुंधरा अभियान की ओर से जन्मदिन और अपनों की याद में पौधे लगाने का कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत लोग खुद के रोपे पौधों का ध्यान रखने की भी जिम्मेदारी उठाते हैं। इसी तरह कुछ लोग अपनों की भी याद में पौधे रोपते हैं।

सिर्फ एक बार लगाएं 50 हजार रुपए, 10 साल तक होगी 1 लाख रुपए की कमाई

क्या आपने कोई ऐसे बिजनेस के बारे में सुना है जिसमें केवल एक बार 50 हजार रुपया लगाने पर 10 साल तक 1 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई होती रहे। नहीं न तो आइए आपको बताते हैं कि कैसे यह संभव है, और इसके लिए क्या करना होगा।

सहजन की खेती

दरअसल सहजन एक मेडिसिनल प्लांट है। जो कम लागत में तैयार हो जाता है। इस फसल की खासियत यह है कि इसकी एक बार बुवाई के बाद चार साल तक बुवाई नहीं करनी पड़ती है।

इसे एक औषधि पौधा भी माना जाता है। सबसे खास बात यह है कि इसकी मार्केटिंग और निर्यात करना भी पहले के मुकाबले अब बेहद आसान हो गया है। जिस वजह से विदेशों में भी इसकी डिमांड काफी बढ़ गई है।

ऐसे कमा सकते हैं 1 लाख रुपए

अगर आप एक एकड़ में सहजन की खेती करते हैं तो इसके लिए आपको करीब 1200 पौधे लगाने होंगे। जिसका खर्च करीब 50 हजार रुपया बैठेगा। बाजार के जानकारों के मुताबिक एक एकड़ में सहजन की उत्पादन करने पर आपको सालाना 1 लाख रुपए की कमाई होगी।

आम तौर पर एक पेड़ 10 साल तक अच्‍छा उत्‍पादन करता है। इसलिए अगर आप एक बार पौधा लगाते हैं तो आप 10 साल तक इससे कमाई कर सकते हैं। आपको बता दें कि इसकी खेती सर्द इलाकों में करना ज्यादा फायदे का सौदा नहीं है। इसलिए आप इसकी खेती गर्म इलाकों में करें तो मुनाफा ज्यादा हो सकता है।

चारा काटने और कुतरा करने वाली मशीन,1 घंटे में काटती है 3 टन हरा चारा

हरा चारा काटने वाली मशीने तो आप ने बहुत देखी होंगी लेकिन काटने के बाद चारे का कुतरा(छोटा छोटा काटना ) भी करना पड़ता है ।  जिस से पशु अच्छी तरह से चारे चारे को खा सकते है । इस लिए आप को पहले चारा काटना पड़ता है फिर कुतरना पड़ता है ।

लेकिन आज हम जिस मशीन की बात कर रहे है उसकी बात ही अलग है यह मशीन काटने के साथ साथ चारे के कुतरने का भी काम करती है और साथ में इतनी तेज़ी काम करती है के सिर्फ एक घंटे में 3 टन हरा चारा और 1 टन सूखा चारा काट कर कुतर भी देती है । इस मशीन से आप हर तरह का चारा आसानी से काट सकते है चाहे वो किसी भी फसल का क्यों ना हो ।

इस मशीन का नाम है मल्टी क्रॉप चॉपर – 2227 ( MULTI CROP CHOPPER- 2227 ) ।  यह मशीन संतोष एग्री मशीनरी द्वारा त्यार की गई है । इस मशीन को किसी भी ट्रेक्टर से जोड़ा जा सकता है जिसकी क्षमता 80HP जा उस से ज्यादा हो । यह मशीन चारे का साइलेज बनाने के लिए और डेरी फार्म के लिए बहुत ही उपयोगी है क्योंकि उनको बड़ी मात्रा में चारा चाहिए होता है और वह भी बहुत ही कम समय में ।

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

अगर आप इस मशीन की कीमत जानना चाहते है तो निचे दिए हुए पते पर संपर्क कर सकते है

  • Company Name : SANTHOSH AGRI MACHINERY
  • Address : No.282, Kartar Complex, Salem to cuddalur Main Road, Coimbatore – 636108, Tamil Nadu , India
  • Contact Person : Mr. Prem Kumar (Manager)
  • Mobile : +917373032415, +917373032411

शिमला और मनाली से भी ज्यादा खूबसूरत है हिमाचल का ये गांव, सिर्फ 4 हजार रुपए आता है घूमने का खर्च

भारत के ज्यादातर हिस्सों की हवाएं गर्म हो चली हैं। मतलब गर्मी ने दस्तक दे दी है। साथ ही बच्चों की छुट्टियां शुरू हो चली है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश घूमना एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। ऐसे में हिमाचल का छोटा सा गांव तोष नया टूरिस्ट प्लेस बन रहा है।

पार्वती वैली में स्थित ये गांव शोर-शराबे से बिल्कुल दूर है। साथ ही झरनों और हरे-भरे पहाड़ों की वजह से यहां की सुंदरता देखते ही बनती है। तोष के आसपास घूमने के कई अन्य टूरिस्ट प्लेस भी हैं। ऐसे में यहां घूमने का प्लान बना सकते हैं।

कैसे जाएं

दिल्ली से तोष जाने के लिए सबसे अच्छा साधन बस होती है। इसे कश्मीरी गेट बस अड्‌डे से ले सकते हैं। यहां हिमाचल प्रदेश की रोडवेज और प्राइवेट दोनों तरह की बसें मौजूद रहती है। कश्मीरी गेट से सीधे हिमाचल के भुंतर के लिए बस मिलती है।

इसके बाद भुंतर से तोष के लिए किराए पर अपनी टैक्सी ली जा सकती है या फिर रोडवेज बस का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो वार्षेणी तक जाती है, जहां से तोष के लिए पैदल रास्ता है। इसके अलावा दिल्ली से चंढ़ीगढ़ तक प्लेन और फिर वहां से बस या फिर टैक्सी से भी जाया जा सकता है।

खर्च

अगर हिमालच रोड़वेज की ऑर्डिनरी बस से जाते है, तो तोष आने-जाने में मात्र तीन हजार रुपए
खर्च करने पड़ेंगे। दिल्ली से भुंतर तक रोडवेज का किराया 680 रुपए है। वहां से हिमाचल रोडवेस की बस से वार्षेणी तक 50 से 60 रुपए लगते हैं, जबकि वार्षेणी से तोष के लिए पैदल रास्ता है।

ऐसे में तोष आना-जाना 1500 से 1600 में हो जाएगा। अगर एक दो दिन होटल और एक दिन कैंप में रुकते हैं, तो करीब 1500 रुपए के करीब खर्च आता है। वहीं 1000 रुपए अन्य खर्च आ सकता है।

आसपास घूमने की जगह-

तोष जाते वक्त रास्ते में ही कसौल पड़ता है, जहां घूमने के साथ शॉपिंग भी कर सकते हैं। इसके अलावा एडवेंचर पसंद है, तो तोष से खीरगंगा के लिए ट्रैकिंग कर सकते है, जो कि तोष से 14 किमीं. दूर है। इसके लिए दो दिन वक्त लगता है। खीरगंगा में गर्म पानी की झील है, जो टूरिस्ट में काफी एडवेंचर पैदा करती है। टूरिस्ट खीरंगगा में रात रुककर कैंपिंग भी कर सकते
हैं।

जाने क्या होगा अगर अचानक से गायब हो जाए सूरज, धरती पर होगा इतना विनाश जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती!

धरती पर जीवन का मुख्य स्रोत सूर्य है. सूर्य अपार उर्जा का भंडार है जिसके होने से ही धरती पर दिन और रात होते हैं, जिससे जीवन एक लय में चलता है. सूर्य धरती से 10 लाख गुना बड़ा है और यह नाभिकीय संलयन क्रिया के जरिए सौर मंडल के सभी ग्रहों को उर्जा और गर्मी देता है.

लेकिन क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते हैं कि सूर्य अगर अचानक से गायब हो जाए तो क्या होगा ? चलिए आज इसी बात को जानते हैं कि अगर सूरज अचानक से कहीं गुम हो जाता है तो इसका क्या असर देखने को मिलेगा…

गुरुत्वाकर्षण बल

सूर्य के गायब हो जाने के बाद 8 मिनिट और 19 सेकंड उसकी रोशनी और उर्जा पृथ्वी पर आती रहेगी. क्योंकि सूर्य की रोशनी को पृथ्वी पर पहुंचने में 8 मिनिट और 19 सेकंड जितना वक्त लगता हैं. उसके बाद पृथ्वी पर अनंत काल की रात्री की शुरुआत हो जाएगी.

सूर्य के अचानक गायब हो जाने के बाद पृथ्वी न केवल सूर्य के प्रकाश और उर्जा को खो देगी बल्कि उसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव भी खो देगी. धरती सूर्य की कक्षा से बाहर निकल जाएगी. पृथ्वी प्रति सेकंड 18 मील की गति से किसी एक सीधी रेखा में अपना प्रवास शुरू कर देगी.

प्रकाश संश्लेषण की क्रिया

वनस्पतियां कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से खाना बनाने के लिए सूर्य की रोशनी का उपयोग करती हैं. सूरज के बिना पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को inhale नहीं कर पाएंगें और प्राणवायु ऑक्सीजन को exhale नहीं कर पाएंगें.

ऐसे में सूरज की रोशनी के बिना पेड़ पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया भी बंद हो जाएगी. लेकिन पौधों के बिना भी पृथ्वी पर इतनी मात्रा में ऑक्सीजन होगी की पृथ्वी जनजातियां हजारों सालों तक जिंदा रह पाएंगी.

पृथ्वी पर तापमान

बिना सूरज के हमारी पृथ्वी पर तापमान गिरने लगेगा और पूरा ग्रह जमने लगेगा. धरती को जमने में लाखों साल लगेंगे, लेकिन पृथ्वी की उपरी पपड़ी का तापमान 1 हफ्ते के अन्दर-अन्दर ही 0 डिग्री से नीचे चला जाएगा और 1 साल के भीतर माइनस 100 डिग्री तक पहुंच जाएगा

और कुछ ही लाखों सालों में तापमान माइनस 240 डिग्री स्थिर पर होगा लेकिन पृथ्वी की भूतापीय ऊर्जा अभी भी काम कर रही होगी. जीवित रहने के लिए उपयुक्त गर्मी हासिल करने के लिए पृथ्वी की भूतापीय उर्जा का सहारा लेना पड़ेगा.

हवा के बादल

सूर्य के जाने के 1 से 3 सालों के बीच समंदरों की सतह जम कर ठोस हो जाएगी. तब बर्फ एक INSULATOR का काम करेगी, बर्फ की नीचे की सतह का पानी लाखो सालों तक बहता रहेगा.सूर्य के गायब हो जाने के 20-30 सालों में हमारा ग्रह इतना ठंडा हो जाएगा कि हमारा वातावरण प्रवाही स्वरूप का होने लगेगा. हो सकता है की हवा के बादल बनने लगे और LIQUID AIR के रूप में उसकी बारिश होने लगे.

अब 55 दिन में तैयार होगी मूंग की ये नई किस्म

प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में किसान मूंग की खेती करते हैं, लेकिन कई बार पीला मोजैक रोग से फसल को भारी नुकसान होता है। ऐसे में मूंग की कल्याणी किस्म की खेती कर किसान नुकसान से बच सकते हैं।

वाराणसी के कुदरत कृषि शोध संस्था ने मूंग की नई किस्म विकसित की है। ये किस्म 55 दिन में पककर तैयार हो जाएगी। आमतौर पर मूंग की फसल 65-70 दिन में पकती है। इसकी खासियत यह है कि इसके लंबे गुच्छे रहेंगे, फली गहरे हरे रंग की होगी।

कुदरत कृषि शोध संस्था के किसान प्रकाश सिंह व रघुवंशी सिंह बताते हैं, “आमतौर पर मूंग की दूसरी किस्में साठ से सत्तर दिनों में तैयार होती हैं, लेकिन ये किस्म 50-55 दिनों में ही तैयार हो जाती है। ये कई तरह के रोग अवरोधी भी है, जिससे इसमें रोग लगने का भी खतरा नहीं रहता है।”

यह किस्म उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, बंगाल, छत्तीसगढ़, पंजाब आदि राज्यों के लिए तैयार की है। इस किस्म में प्रति एकड़ छह-सात कुंतल उत्पादन होता है और बीज प्रति एकड़ छह किलो ही लगता है।

मूंग कल्याणी किस्म की बुवाई करने से जमीन की उर्वराशक्ति में बढ़ोत्तरी होती है। साथ ही फसल कटने के बाद हरी खाद भी तैयार हो जाती है। पीला मोजेक, चूर्णित आसिता रोग के प्रति सहनशील रहेगा।

बीजशोधन पांच ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से राइजोबियम कल्चर से बीज का शोधन करके ही बुवाई करनी चाहिए, शोधन के बाद बीज छाया में सुखाकर बुवाई करें।जायद सीजन में 25 से 30 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर बुवाई करनी चाहिए।

कतार से कतार की दूरी 20 से 25 सेमी पर रखें। जबकि खरीफ सीजन 15 से 20 किलो बीज प्रति हेक्टेयर। बुवाई जून-जुलाई में करें। कतार से कतार की दूरी 30 व पौधों की दूरी चार सेमी. रखना चाहिए।

यह है महिलाओं के प्रेग्नेंट होने के लिए सही उम्र, इंटेलिजेंट होगा बच्चा

आजकल करियर की भागदौड़ में WOMEN पहले की तुलना में अब देर से प्रग्नेंट हो रही हैं. यहां तक की बहुत- सी महिलाएं अपने फिगर को MAINTAIN करने के चक्कर में भी जल्दी प्रेग्नेंट नहीं होती हैं. अब तो महिलाएं अपने एग्स यानी अंडों को फ्रीज करके बाद में अपनी इच्छा के मुताबिक मां बन सकती हैं.

इस वजह से उन्हें कई बार बहुत-सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है.मगर अब देर से मां बनने वाली महिलाओं के लिए एक अच्छी खबर है . दरअसल एक शोध में सामने आया है कि जो महिलाएं 30 की उम्र में बच्चा पैदा करती हैं, उनका बच्चा तेज-तर्रार और होशियार होता है.

एक रिसर्च के मुताबिक जो महिलाएं 30 या इसके बाद बच्चै पैदा करती हैं उनमें यूट्रस कैंसर का खतरा कम होता है. साथ ही इस उम्र में बच्चा तेज और होशियार भी पैदा होता है. रिसर्च के दौरान इसके पीछे की मुख्य वजह पता चली है कि इस उम्र तक महिलाएं एक तो पूरी तरह से सेटल हो जाती हैं.

दूसरा वो मानसिक तौर पर बच्चा पैदा करने के लिए तैयार भी हो जाती हैं. डॉक्टर्स के मुताबिक भी बच्चा पैदा करते वक्त मां का मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से स्वथ्य रहना बेहद जरूरी है. अगर मां स्वस्थ नहीं रहेगी तो इसका नकारात्मक असर बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ेगा.